अमेरिका‑ईरान तनाव के बीच के बीच तेल की कीमतें सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बुधवार को लगभग सात महीने के उच्च स्तर के करीब पहुंच गईं। अमेरिका और ईरान के बीच स्विटजरलैंड के जिनेवा में होने वाली परमाणु वार्ता से पहले तेल बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमत $71.29 प्रति बैरल के आसपास है, जबकि WTI लगभग $66.11 प्रति बैरल पर इस समय कारोबार कर रहा है। जानकारों का कहना है कि मध्य पूर्व में संभावित संघर्ष के कारण सप्लाई में रुकावट का डर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।

अमेरिका और ईरान की कूटनीतिक पहल जारी
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि परमाणु समझौता डिप्लोमेसी के रास्ते संभव है। इसपर बल प्रयोग से काम नहीं चलने वाला। अगर दोनों पक्ष इच्छा शक्ति दिखाएं तो मामले का हल निकल सकता है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान डील नहीं करता है तो इसके “भयंकर परिणाम” सामने आ सकते हैं।
हम आपको बता दें की अमेरिका और ईरान के बीच तीसरे दौर की बातचीत अगले हफ्ते जनेवा में होने वाली है। और अगर इस वार्ता में को हल नहीं मिलता है तो युद्ध का आशंका बढ़ सकती है।
सैन्य तनाव और जियो-पॉलिटिकल प्रभाव
अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर दी है। जिसमें विमान वाहक पोत और लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसका मक़सद ईरान पर दबाव बनाना और क्षेत्र में अपना दबदबा कायम करना है।
तेल की कीमतों में वृद्धि का एक बड़ा कारण यही जियो पॉलिटिकल तनाव है। निवेशकों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो इस परिस्थिति में कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
सोना और चांदी में उछाल
तेल बाजार में बढ़ते तनाव के बीच सोने और चांदी में भी तेजी देखी गई। निवेशक जोखिम भरे माहौल में सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। कॉमेक्स गोल्ड में फिलहाल आधा परसेंट का उछाल है वहीं सिल्वर में साढ़े तीन परसेंट की तेजी देखी जा रही है। भारत में चांदी 2.5 परसेंट से ज्यादा की तेजी के साथ 2,67,500 रुपए प्रति किलो के ऊपर कारोबार कर रही है। एमसीएक्स गोल्ड करीब एक परसेंट के उछाल के साथ 1 लाख 61 हजार प्रति दस ग्राम के ऊपर कारोबार कर रहा है।
बाज़ार पर असर
जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच जेनेवा में होने वाली तीसरे दौर वार्ता सकारात्मक परिणाम लाती है तो तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है। लेकिन अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।
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