देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर शनिवार शाम लोहरदगा शहर भगवान जगन्नाथ की भक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आया। ईस्ट गोला रोड स्थित मौसीबाड़ी से भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक घूरती रथ यात्रा श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ निकाली गई। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को आकर्षक ढंग से सुसज्जित रथ पर विराजमान कर पूरे विधि-विधान के साथ नगर भ्रमण कराया गया।

शंखध्वनि, घंटियों की मधुर गूंज और “जय जगन्नाथ” के जयघोष के बीच रथ यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। पूरे रास्ते श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन के लिए पहुंचे। रथ की रस्सी खींचने को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। जैसे-जैसे रथ आगे बढ़ता गया, भक्तों का कारवां भी उसके साथ चलता रहा और पूरा शहर भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा।
सदियों पुरानी परंपरा आज भी जीवंत
लोहरदगा शहर में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की यह परंपरा वर्षों से श्रद्धा और आस्था के साथ निभाई जा रही है। शहर के तीन अलग-अलग ठाकुरबाड़ी मंदिरों से रथ यात्रा निकालने की परंपरा है। इसी क्रम में ईस्ट गोला रोड स्थित मौसीबाड़ी से निकली घूरती रथ यात्रा गुदरी बाजार स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर, थाना रोड स्थित चंद्रशेखर आजाद ठाकुरबाड़ी मंदिर और तिवारी दुड़ा स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ यात्रा का समापन हुआ।
तीनों रथ यात्राओं में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए और रथ की रस्सी खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की।
क्या है घूरती रथ यात्रा का धार्मिक महत्व?
तपोवन मंदिर के महंत ओम प्रकाश सारण ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की घूरती रथ यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व है। उन्होंने कहा कि स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ हो जाते हैं और नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में विश्राम एवं उपचार के लिए विराजमान रहते हैं। इस दौरान उनकी विशेष सेवा-पूजा की जाती है।
महंत के अनुसार, नौ दिनों के उपरांत जब भगवान पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाते हैं, तब देवशयनी एकादशी के दिन भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के साथ अपने धाम लौटते हैं। इसी शुभ अवसर पर घूरती रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसे भगवान की घर वापसी का उत्सव माना जाता है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी खींचने और उनके दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। भगवान अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं तथा उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यही कारण है कि हर वर्ष देवशयनी एकादशी पर लोहरदगा में निकलने वाली तीनों रथ यात्राओं में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम बनी यह रथ यात्रा एक बार फिर लोहरदगा की धार्मिक विरासत और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई।
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