केंद्र सरकार के Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 यानी MMDR बिल को लेकर झारखंड में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। महागठबंधन के नेताओं ने बिल को राज्य के अधिकारों और खनिज संपदा पर झारखंड के हितों के खिलाफ बताते हुए इसके विरोध में लोकतांत्रिक आंदोलन की घोषणा की है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह विधेयक अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए लंबित है।
महागठबंधन की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनिता यादव ने कहा कि केंद्र सरकार जिस तरह राज्यों के अधिकारों का हनन करने का प्रयास कर रही है, उसका महागठबंधन पुरजोर विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि बिल के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा और राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
शुभेंदु सेन ने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड पर इस विधेयक के दूरगामी आर्थिक प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रही है, जो संघीय व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम है। उन्होंने बताया कि महागठबंधन पहले राष्ट्रपति से मिलकर बिल पर हस्ताक्षर नहीं करने का आग्रह करेगा। इसके साथ ही राज्यपाल से मुलाकात कर विधेयक के संभावित दुष्परिणामों से अवगत कराया जाएगा।
अजय ने भाजपा सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि उन्हें झारखंड के हितों की वास्तव में चिंता है, तो उन्हें संसद में इस विधेयक का विरोध करना चाहिए था और राज्य से जुड़े सवाल उठाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि 22 अगस्त को इंडिया गठबंधन की बैठक होगी, जिसके बाद राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर बिल का विरोध दर्ज कराया जाएगा। उनका कहना था कि देश के खनिज संसाधनों में झारखंड की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए राज्य के अधिकारों और हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
आनंद प्रसाद गुप्ता ने कहा कि खनन और खनिज क्षेत्र से जुड़े इस विधेयक का विरोध व्यापक स्तर पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और प्रस्तावित बदलावों का सीधा असर राज्य और यहां के लोगों के हितों पर पड़ सकता है। उन्होंने बिल के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी।
रंजन यादव ने कहा कि यह विधेयक झारखंड के हितों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड के आदिवासी, गरीब और पिछड़े वर्गों के हितों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने आशंका जताई कि कानून लागू होने के बाद राज्य के विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि महागठबंधन राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेगा और केंद्र सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी करेगा। रंजन यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से इस मुद्दे पर की जा रही पहल के साथ महागठबंधन आगे बढ़ेगा और झारखंड के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से जारी रखेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी MMDR Amendment Bill 2026 के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन का आह्वान कर चुके हैं।
महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि झारखंड की खनिज संपदा केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय आबादी के हितों से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में MMDR बिल को लेकर राज्य के अधिकार, राजस्व और संघीय ढांचे से जुड़े सवालों पर आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार हैं।
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