झारखण्ड में MMDR BILL को लेकर राजनीति तपिश बढ़ गई है। एक तरफ झामुमो ने आंदोलन का ऐलान कर दिया तो दूसरी तरफ भाजपा ने इसे राज्य की जनता को बरगलाने वाला आंदोलन बताया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता कर इस आंदोलन पर सवाल उठाया है।पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाये गए MMDR BILL बिल राज्य और राष्ट्र हित में है, लेकिन MMDR BILL को लेकर झारखण्ड मुक्ति मोर्चा इसे गलत तरीके से पेश कर रही है। राज्य का बच्चा बच्चा जनता है कि झारखण्ड के धनबाद, बोकारो , चतरा हज़ारीबाग, रामगढ़ में कोयला कि लूट मची है। झामुमो ने चुनाव के समय जल जंगल जमीन की बात की लेकिन सत्ता में आने के बाद जल जंगल जमीन को एक सिण्डिकेट के हवाले कर लूट खंड बना दिया।
उन्होंने कहा कि झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के महासचिव 1.5साल होटवार जेल में बिता चुके है। संताल प्रगाना से आने वाले एक मंत्री पत्थर की दलाली में जेल काट चुके है. जिससे साबित होता है कि झारखण्ड में कांग्रेस झामुमो ने लूट का काम किया है। राज्य में निवेश जीरो है । लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन देश से लेकर विदेश तक घूम कर निवेश का ढिंढोरा पीटा लेकिन मिला कुछ नहीं इसके पीछे की वजह साफ है कि झारखण्ड में लूट हो रही है तो कोई भी निवेश राज्य में करना पसंद नहीं करता है।अब MMDR पर आंसू बहाने वाले लोग यह नहीं बता रहे है कि खनन के रॉयल्टी का 90 प्रतिशत राज्य सरकार को भेजा जाता है। आजादी के बाद से यह व्यवस्था लागू है।
राज्य सरकार खनन को लेकर चिंता जाहिर कर रही है. लेकिन यह राज्य सरकार कितना संवेदनशील है इससे जाहिर होता है कि राज्य में 34कॉल ब्लॉक को मंज़ूरी मिली. लेकिन राज्य सरकार ने 4 को ही शुरू किया।आज तक लौह अयास्क और बोकसाइट की 17 ब्लॉक ही शुरू किया जा सका।उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सेस को लेकर रोना रोती है. जबकि ओड़िसा सरकार ने 7 हजार करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त कर चुकी है , इसमें इनके लक्ष्य को देखेंगे तो यह भी बेहद कम है।
डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड में भी राज्य सरकार ने घोटाला किया है।धनबाद, चईबासा, चतरा में डिस्ट्रिक्ट फंड में लूट हुई है. इसके वजह से धनबाद में लोग काला पानी और चाईबासा में लाल पानी पिने को मज़बूर है। जबकि जब भाजपा की सरकार थी तो डीसी को सख्त आदेश दिया गया था की राज्य के वैसे इलाके जहाँ खनन हो रहा है वहां शुद्ध पेय जल की व्यवस्था की जाएगा. लेकिन सब बंद कर सिर्फ लूट किया गया।उन्होंने बताया कि सरकार के सरपरसती में चल रही लूट के वजह से वैध खनन प्रवभावित हुआ है 2024-25 44.41मिलियन टन 37.25बिलियन टन पहुंच गया
जबकि लीगल माइनिंग घटेगी तो जाहिर है कि राज्य का नुकसान होगा।
राज्य में 6 साला में 26 खनन पट्टा समाप्त हो गया है. जिसे चालु करने के दिशा में कोई पहल नहीं की गई।सरकार से पूछा की 6 साल में किस आदिवासी मुलवासी की दशा सुधरी है. इनकी हालत नहीं सुधरी लेकिन सत्ता में बैठे लोग और नौकरशाह के दिन जरुर बदल गए है. यही वजह है कि अब MMDR से इनके लूट ख़त्म हो जायेंगे तो यह माहौल माहौल बना रहे है।सेस लगाने के वजह से लोहा और कोयला महंगा हो रहा है. इस वजह से राज्य में कोयला और लोहा नहीं बिक रहा है। इसके पीछे कि वजह है कि राज्य सरकार ने सेस लगा दिया।
ओड़िसा और छत्तीसगढ़ के मुकाबले यहाँ कोयला 1500 रुपया महंगा है. लोहा में प्रति टन 8284, ओड़िसा 7493,छत्तीसगढ़ 7422 इससे साफ है कि राज्य को सेस लगा कर बर्बाद किया जा रहा है. उन्होंने कहाँ कि राज्य की जनता को बहलाने का काम किया जा रहा है।





