अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुच गया। आज 1 डॉलर के मुकाबले रुपया लुढ़ककर 93 पर पहुंच गया। जो कि रुपए के लिए अबतक का सबसे निचला स्तर है।

केवल इस साल जनवरी से अबतक रुपए में 3 परसेंट की गिरावट दर्ज की गई है। पश्चिम एशिया संकट के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन रुकावट, क्रूड और एलपीजी संकट का असर रुपए पर दिख रहा है। आज एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 0.7 परसेंट लुढ़ककर 93 रुपए 27 पैसे के अबतक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
ईरान युद्ध की शुरुआत से अबतक रुपया करीब 2 परसेंट कमजोर हुआ है। एक तो महंगा तेल ऊपर से कमजोर रुपया भारतीय इकोनॉमी के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है। भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी तेल आयात और कंज्यूम करने वाली इकॉनोमी है।
विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII लगातार भारत से डॉलर निकालने में लगे हैं। केवल इस महीने अबतक FII भारतीय शेयर बाजार से 8 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। पिछले एक साल में रुपए में करीब 7 परसेंट की कमजोरी आई है। डॉलर के साथ साथ यूआन, ब्रिटिश पाउंड और यूरो के मुकाबले भी रुपया कमजोर पड़ा है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है। इसी वजह से हाल के तेल संकट ने भारतीय शेयर बाजार को लगभग एक साल के निचले स्तर तक धकेल दिया, बॉन्ड यील्ड बढ़ा दी और सरकार के राजकोषीय घाटे तथा चालू खाता घाटे को लेकर चिंता बढ़ा दी।
अब रुपये की गिरावट को समझें। जब देश से ज्यादा पैसा बाहर जा रहा हो (जैसे तेल आयात के कारण) और विदेशी निवेशक भी शेयर बाजार से पैसा निकालने लगें तो रुपये की वैल्यू गिरती है। शेयर बाजार के गिरने से भी विदेशी निवेश घटता है जो रुपये को और कमजोर करता है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण भूमिका भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की है। RBI समय-समय पर डॉलर बेचकर और रुपये खरीदकर बाजार में दखल देता है। इससे रुपये की गिरावट को अचानक तेज होने से रोका जाता है।
जानकारों का कहना है कि RBI ने अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच 50 अरब डॉलर से अधिक की शुद्ध डॉलर बिक्री की है और संभावना है कि 2026 में भी यह सिलसिला जारी रहेगा। इसका मतलब है कि RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करके रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा है। यानी रुपए में बड़ी गिरावट को रोकने में RBI अहम योगदान निभा रहा है।
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