बिहार में राजनितिक दाव पेज तो लगे ही रहते है लेकिन इसी बीच तेजस्वी का बड़ा बयान से फिर पक्ष- विपक्ष चर -मरा सी गई है तेजस्वी ने अपने बयान में कहा कि बिहार में अगले 6 महीने में आने वाली है भयंकर फाइनेंस क्राइसिस होने वाली है। अगले 6 महीने में बिहार की हालत फाइनेंस क्राइसिस के कारण ज्यादा खराब होने वाली है..फाइनेंस क्राइसिस के साथ-साथ बिहार में अपराध बहुत ज्यादा बढ़ने वाला है। फाइनेंस क्राइसिस को लेकर उन्होनें कहा कि देखिए काफी फसल जो है किसानों का जो है क्षति पहुंची है। अब तक उसका भी मुआवजा जो है किसानों को नहीं मिला है। हमने कई बार जो है मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक चिट्ठी लिखा बात भी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। चुनाव है तो भाजपा को बिहार के लोग याद आते हैं चुनाव खत्म होते ही भूल जाते हैं।
तो ये तो हम लोग शुरू से कह रहे हैं। बीजेपी के लोग बिहार के लोगों का भला नहीं चाहते हैं, बिहार का भला नहीं चाहते हैं। वो अपना व्यक्तिगत स्वार्थ अपना भला चाहते हैं। आप देखिएगा चुनाव जीतने के चक्कर में बिहार का पूरा खजाना जो है खाली कर दिया गया है। अब पैसे नहीं है। ना विभागों को देने के लिए पैसा है, ना आपदा में देने को पैसा है। कर्ज पर जो है बिहार चल रहा है।
और अब आप लोगों को आज भी बता देते हैं, आने वाले छह महीने बाद बिहार की स्थिति जो है और भी बद से बदतर होने जा रही है। महंगाई, बेरोजगारी, गरीबी और बढ़ता अपराध चरम पर है जहां केवल अपराधियों का बोलबाला है। आने वाले समय में कानून व्यवस्था और क्राइम का जो ग्राफ है वो और बढ़ेगा। क्योंकि सबसे ज्यादा बेरोजगारी है। और जिस हिसाब से भाजपा की सरकार, केंद्र की सरकार महंगाई बढ़ा रही है इससे लोगों का जीना जो है मुश्किल हो गया है। आप तो देख ही रहे हैं क्या हो रहा है पूरे देश में।
लेकिन प्रधानमंत्री जी को इनकी फिक्र नहीं, बिहार के लोगों की फिक्र नहीं है। उनको बाढ़ में भी दीया जलवाना है। वो भी सरकारी खजाने का। हर सरकार सोचेगी कि 100 करोड़ से भी अधिक खर्चा केवल दीया जलाने में लगा दी। आज कम से कम ये पैसा अगर किसानों को मिल जाता जिनकी फसल की बर्बादी हुई है, या बाढ़ पीड़ितों को मिलता, तो कितनी बड़ी राहत होती।
अब दिखावटी मिलावटी राजनीति कर रहे हैं। सैलरी देने की बात कर रहे हैं उससे क्या होगा? 3 करोड़, 4 करोड़? 70 फीसदी बिहार बाढ़ से डूबा हुआ है। लगभग 50 लाख लोग जो हैं इसमें चपेट में आए हैं बाढ़ के। सूखा से समझिए कितने लोग परेशान हैं।
तो ये भाजपा ने तो, और सम्राट चौधरी ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिनको कुछ ज्ञान ही नहीं है। कोई मतलब नहीं है। डबल इंजन की सरकार, बहुत तेजी से विकास करेंगे। कहां हो रहा है? कौन सा विकास? जब से सरकार बनी है एक काम बता दीजिए ना? एक काम जो सरकार ने किया हो।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं खड़गे जी उन्होंने कहा है कि देश में इलीगल चुनाव हो रहे हैं, इलीगल प्रधानमंत्री हैं और इलीगल गृह मंत्री हैं। आप तो बोलिए ना? नहीं होता? फर्जीवाड़ा हुआ है पूरी तरीके से। और इसको लेकर के हम लोग जो है बैठक में भी हम लोग गए हुए थे। बैठक भी हुई है।
चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार वही करते हैं जो अमित शाह और मोदी जी चाहते हैं। उनका केवल यही काम है कि भाजपा को फर्जीवाड़ा करके, फर्जी चुनाव कराकर के चुनाव जितवाना। और वो ये काम कर रहे हैं इसलिए उनको प्रोटेक्ट किया गया। राष्ट्रपति भी अपने पद से हट जाएं, कार्यकाल खत्म हो जाए तो उन पर भी कार्रवाई हो सकती है। लेकिन ज्ञानेश कुमार अपने पद से भी हट गए, आजीवन भर कोई केस नहीं हो सकता, कोई कार्रवाई नहीं हो सकती, कोई जेल नहीं भेज सकता। आखिर ये कानून क्यों लाया गया?
जो एक साल के लिए वोट का रिकॉर्ड रखना होता था पहले, उसको 45 दिन का क्यों कर दिया गया? चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पहले पैनल में होते थे सिलेक्शन ऑफ सीईसी के, चीफ जस्टिस को हटाकर के केंद्र मंत्री को रख दिया गया। तो प्रोटेक्शन तो दे ही रही है ना भाजपा क्योंकि फर्जी चुनाव करा रहे हैं। इसलिए ज्ञानेश कुमार को जो है, और ऐसे कई नमूने आएंगे आ जाएंगे।
असली जड़ तो भाजपा है अमित शाह हैं, मोदी हैं। आगे आप लोग क्या करेंगे? हम लोग जनता के बीच जाएंगे। लड़ाई लड़ेंगे। लड़ते रहेंगे, मरते दम तक लड़ेंगे अन्याय के खिलाफ
सीजेपी का प्रदर्शन एक बार फिर से होगा 10 अक्टूबर को, महाराष्ट्र में भी आज आंदोलन किया जा रहा है। वाटर कैनन और लाठीचार्ज के लिए सरकार ने साढ़े 62 करोड़ रुपये खर्च किया है कर रही जा रही है। और आंदोलन लगातार रुक नहीं रहा है छात्र सड़क पर उतर रहे हैं। इसका मतलब है कि सरकार से लोग संतुष्ट नहीं हैं, लोग गुस्से में हैं।
जिस चीज के लिए जनता सरकार को चुनती है, ये तो फर्जीवाड़े तरीके से ये सरकार आई है, इनको वोट से क्या मतलब है। यही तो फर्क है। कि फर्जीवाड़े तरीके से अगर कोई सरकार आती है तो जनता का क्यों सुनेगी, उसका तो वोट का महत्व ही नहीं है तो वोट की चोरी हो रही है। इनको क्या लेना देना फिर जनता से? जब ज्ञानेश कुमार ही इनका काम कर रहे हैं, तो इनको तो फिक्र ज्ञानेश कुमार की ना है। इसलिए पूरा भाजपा जो है ज्ञानेश कुमार जी के रक्षा में खड़ी हो गई है।
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