झारखंड आंदोलनकारी और वरिष्ठ नेता सूर्य सिंह बेसरा ने हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। रांची के मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने JPSC और JSSC में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। बेसरा ने JPSC मामले की जांच CID के बजाय CBI से कराने, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे और राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC में हुई कथित गड़बड़ियों ने हजारों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका आरोप था कि निष्पक्ष जांच तभी संभव है जब पूरे मामले की जांच CBI के हवाले की जाए। उन्होंने JPSC के पूर्व अध्यक्ष के साथ-साथ आयोग के सदस्यों की भूमिका की भी जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने प्रभावित अभ्यर्थियों को मुआवजा देने की भी बात कही।
सूर्य सिंह बेसरा ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार, जमीन और माइनिंग घोटालों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड में अब केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की जरूरत है। उन्होंने छात्रों के उलगुलान आंदोलन को नैतिक समर्थन देते हुए अपील की कि आंदोलन को पूरी तरह गैर-राजनीतिक रखा जाए, ताकि इसकी ताकत और उद्देश्य कमजोर न हों। 1986 के आजसू आंदोलन और 1985 के असम छात्र आंदोलन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं के नेतृत्व में बड़ा राजनीतिक बदलाव संभव है और भविष्य में झारखंड की बागडोर भी युवाओं के हाथ में होनी चाहिए।
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में अनियमितताओं, कट-ऑफ जारी न करने और ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को टेंडर देने के आरोपों को लेकर बड़ा JPSC परीक्षा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में सीआईडी जांच के बीच 10 गिरफ्तारियां हुईं और तत्कालीन अध्यक्ष एल.खियांग्ते ने इस्तीफा दे दिया जिसके बाद आयोग ने 9 परीक्षाएं टाल दी गई हैं।
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