Saraikela News: खरसावां जिले की सड़कें लगातार खून से लाल होती जा रही हैं। रफ्तार, लापरवाही और बदहाल सड़कों ने जिले को सड़क हादसों का हॉटस्पॉट बना दिया है। आंकड़े बेहद भयावह हैं। वर्ष 2025 के जनवरी से नवंबर तक महज 11 महीनों में जिले में 231 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 206 लोगों की जान चली गई। यानी हर महीने औसतन 19 लोग सड़क हादसों का शिकार होकर मौत के मुंह में समा रहे हैं।

सबसे ज्यादा मौतें जुलाई महीने में दर्ज की गई हैं, जब 26 लोगों की जान गई। वहीं नवंबर माह में भी दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ये आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि जिले में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। जिले की अधिकांश सड़कें गड्ढों से भरी हुई हैं। जहां सड़कें बेहतर स्थिति में हैं, वहां तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और लापरवाह ड्राइविंग हादसों की बड़ी वजह बन रही है। प्रशासन के लिए सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाना एक बड़ी चुनौती बन चुका है, लेकिन लगातार हादसों के बावजूद आम लोग भी सतर्कता नहीं बरत रहे हैं।
पिछले वर्षों के आंकड़ों से तुलना करें तो स्थिति और भी चिंताजनक नजर आती है। वर्ष 2023 में 209 दुर्घटनाओं में 153 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 2024 में दुर्घटनाओं की संख्या में थोड़ी कमी आई, लेकिन मौतों का आंकड़ा बढ़कर 173 पहुंच गया। वहीं वर्ष 2025 में महज 11 महीनों में ही 206 मौतें दर्ज हो चुकी हैं, जो साफ तौर पर हालात की गंभीरता को दर्शाता है। युवाओं में बाइक स्टंट का बढ़ता चलन भी सड़क हादसों की एक बड़ी वजह बन चुका है। शाम ढलते ही जिले की कई प्रमुख सड़कों पर बाइकर्स खुलेआम स्टंट करते नजर आते हैं, जिससे न केवल उनकी जान खतरे में पड़ती है, बल्कि अन्य वाहन चालकों के लिए भी गंभीर जोखिम पैदा होता है। इसके अलावा बिना हेलमेट बाइक चलाना, ट्रिपल राइडिंग, नशे में वाहन चलाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी हादसों को और बढ़ा रही है।
सरायकेला–आदित्यपुर मार्ग, सरायकेला–चाईबासा मार्ग, कांड्रा–चौका, हाता–राजनगर–चाईबासा सड़क, चांडिल क्षेत्र के एनएच-33 और एनएच-32 पर अक्सर गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। रात के समय सड़कों पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से दोपहिया और चारपहिया वाहन अक्सर सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों से टकरा जाते हैं, जिससे जानलेवा हादसे होते हैं। जिला परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा समय-समय पर सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े भारी वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जाता है, लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
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जिले में कई स्थान ऐसे हैं, जिन्हें ब्लैक स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें चांडिल एनएच पर नागासोरेंग, खरसावां–चक्रधरपुर सड़क पर बड़ाआमदा, सरायकेला–आदित्यपुर सड़क पर दुगनी और सरायकेला–चाईबासा सड़क पर पठानमारा प्रमुख हैं। इसके अलावा भी जिले की कई अन्य सड़कों पर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। औद्योगिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध सरायकेला और आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में भारी वाहनों का दिन-रात परिचालन होता है। देश के विभिन्न राज्यों से रोजाना सैकड़ों बड़े वाहन कच्चा माल लेकर यहां पहुंचते हैं। जिले में अब तक कोई समुचित पार्किंग जोन विकसित नहीं किया जा सका है। मजबूरी में भारी वाहन सड़कों के किनारे खड़े किए जाते हैं, जो हादसों को न्योता देते हैं। जिला प्रशासन द्वारा पार्किंग स्थल चिह्नित करने की प्रक्रिया की बात तो की जाती है, लेकिन अब तक इसे धरातल पर उतारा नहीं जा सका है।
वर्ष 2025 में माहवार सड़क दुर्घटना में मौत के आंकड़े भी हालात की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। जनवरी में 15, फरवरी में 20, मार्च में 21, अप्रैल में 18, मई में 20, जून में 13, जुलाई में 26, अगस्त में 19, सितंबर में 12, अक्टूबर में 17 और नवंबर में 25 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि सड़क सुरक्षा जागरूकता के नाम पर जहां एक ओर सरकारी राजस्व का बंदरबांट हो रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर सड़क सुरक्षा के ठोस उपाय नजर नहीं आ रहे हैं। जब तक सख्त कार्रवाई, बेहतर सड़क, समुचित पार्किंग व्यवस्था और लोगों में वास्तविक जागरूकता नहीं लाई जाती, तब तक सरायकेला–खरसावां जिले की सड़कें यूं ही खून से लाल होती रहेंगी।





