झारखंड मुक्ति मोर्चा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) केंद्रीय समिति की ओर से प्रधानमंत्री को एक पत्र भेजा गया है, जिसमें देश की आर्थिक स्थिति और आम जनता से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए कई अहम मांगें रखी गई हैं। यह पत्र झामुमो केंद्रीय समिति के महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य की ओर से जारी किया गया बताया जा रहा है। पत्र में सरकार से आग्रह किया गया है कि प्रधानमंत्री एक वर्ष तक अपनी विदेश यात्राएं और भाजपा की रैलियां एवं रोड शो स्थगित रखें, ताकि देश में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जा सके।

इसके अलावा पत्र में यह भी मांग की गई है कि कथित रूप से “कॉर्पोरेट मित्रों” के ऋण माफ करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। साथ ही मंत्रिपरिषद के सदस्यों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के काफिलों पर भी नियंत्रण लगाने की बात कही गई है।
आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर जोर
झामुमो की ओर से भेजे गए पत्र में प्राकृतिक संसाधनों—जल, जंगल और जमीन—के निजीकरण और उन्हें कॉर्पोरेट घरानों को सौंपने के आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही मध्यम और लघु उद्योगों को बढ़ावा देने तथा स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की भी मांग की गई है।
कृषि क्षेत्र से जुड़ी मांगों में सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने की बात भी शामिल है। वहीं महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
अन्य आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार ऐसी नीतियों की ओर बढ़ रही है जिससे देश में लॉकडाउन जैसी स्थिति बन सकती है, जिससे रोजगार और शिक्षा पर असर पड़ सकता है।
यह पत्र अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। जहां विपक्ष इसे जनता की आवाज बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
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