झारखंड बजट 2026-27 पर सियासी संग्राम तेज हो गया है। सरकार जहां इसकी तारीफ करते नहीं अघा रही है वहीं विपक्ष ने इसे निराशाजनक और आंख में धूल झोंकने वाला बजट बताया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए राज्य सरकार के बजट पर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बजट को राज्य के समावेशी विकास का दस्तावेज बताते हुए दावा किया कि इससे हर वर्ग को लाभ मिलेगा और विकास की रफ्तार तेज होगी। वहीं विपक्ष ने बजट को दिशाहीन और जनता को गुमराह करने वाला करार दिया है।

सरकार ने कहा बेहतरीन बजट, इससे हर वर्ग का विकास होगा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह बजट राज्य के गरीबों, आदिवासियों, किसानों, युवाओं और महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने इसे “अबुआ दिशोम” की भावना के अनुरूप बताते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य संतुलित और समावेशी विकास है। जिससे गांव से लेकर शहर तक सकारात्मक बदलाव दिखेगा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रेस वार्ता में बजट को “कोरम पूरा करने वाला” करार देते हुए कहा कि यह राज्य के 3 करोड़ 50 लाख लोगों को ठगने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बजट के नाम पर केवल घोषणाएं की हैं, जमीनी स्तर पर ठोस कार्ययोजना का अभाव है।
बाबूलाल मरांडी का सवाल: पिछली राशि का क्या हुआ?
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वर्ष 2025-26 के बजट में 1 लाख 44 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन उसका अपेक्षित उपयोग नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति जस की तस है और लोग आज भी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने बजट को दिशाहीन कहा
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने बजट को निराशाजनक और दिशाहीन बताते हुए कहा कि इसमें युवाओं, छात्रों, महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि केवल बड़ी रकम का प्रावधान कर देने से विकास सुनिश्चित नहीं होता, असली चुनौती उस राशि के समयबद्ध और पारदर्शी क्रियान्वयन की है।
बाउरी ने कहा कि पिछली बार भी विभिन्न मदों में बड़ी राशि खर्च करने की घोषणा की गई थी, लेकिन उसका वास्तविक उपयोग नहीं हो सका। उनके अनुसार यह बजट आम आदमी की आशाओं पर खरा नहीं उतरता और बेरोजगारों, अनुबंधकर्मियों तथा कमजोर वर्गों को ठोस राहत देने में विफल है।
केवल प्रावधान से काम नहीं चलेगा क्रियान्वयन जरूरी
विपक्ष का कहना है कि बजट में बड़ी राशि घोषित करना पर्याप्त नहीं है। योजनाओं की सफलता उनकी प्रभावी निगरानी और समय पर क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने गरीब, आदिवासी, किसान, युवा और महिलाओं के साथ बजट में “छल” किया है और रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया।
कुल मिलाकर, बजट 2026-27 को लेकर राज्य में सियासी माहौल गरमा गया है। जहां सरकार इसे विकास का रोडमैप बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति और जनता को भ्रमित करने वाला दस्तावेज करार दे रहा है। आने वाले दिनों में बजट के प्रावधानों के क्रियान्वयन और उसके जमीनी असर पर ही इस बहस का अंतिम मूल्यांकन किया जाएगा।





