झारखंड में राज्यसभा चुनाव में Jharkhand politics गहराता दिख रही है, क्युंकि राज्यसभा चुनाव को लेकर Jharkhand politics में बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड की राजनिती में यह इतिहास रहा है कि जब भी चुनाव आता है तानाशाही का दौर चलने लगता है, पक्ष- विपक्ष आमने – सामने आते है, फिर आरोप – प्रत्यारोप Jharkhand politics का इतिहास बन जाता है। बता दें इस राज्य सभा चुनाव को लेकर बीजेपी प्रदेश महामंत्री अमर कुमार बावरी का कहना है कि कांग्रेस के अंदर सम्मती नहीं है आपस में ही टकराव है। इनके वर्ड और एक्शन साथ नहीं है, कहते है क्या है और करते क्या है ।जो कहते है उसके विपरीत करते है । कांग्रेस पार्टी बंगाल में जाकर टीएमसी को हराती है फिर उस जाकर मिल जाती है, झारखंड में भील वही हाल करती है झारखंड में झामूमो को हरा कर फिर जा कर मिल जाती है,इसलिए अपनी कमजोरी और अपने गलतियों पर को बीजेपी पर डाल देते है।

झारखंड के कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय ने राज्यसभा चुनाव को लेकर कहा कि भाजपा उत्साहित है क्योंकि इनकी सेंटिग हो चूकी है साथ हि इन्होनें कहा कि इन्हें जीत हार की चिंता कैसे होगी ,इनकी तो पहले ही सेंटिग हो चूकी है।
झारखंड में राज्यसभा चुनाव में गठबंधन की गांठ मजबूत बनाए रखने को लेकर गठबंधन दल के विधायक एकजुट होने का दावा कर रहे हैं। उनके इस दावे के साथ साथ अब सरकार चला रही तमाम पार्टियों की एकजुटता को लेकर भी दाव लगती नजर आ रही है। इस चुनाव परिणाम के साथ ही राज्य की भावी राजनीति और सरकार की स्थिति परिस्थिति का भी परिणाम सामने आने की संभावना दिखाई पड़ रही है। यही कारण है कि इस चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी दल की तरफ से हर दाव खेला जा रहा है ।
माना जा रहा है कि इस चुनाव को लेकर तमाम राजनीतिक दलों के सामने इस बात की चुनौती है कि किस तरीके से अपने प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित कराई जाए और अपने विधायकों को एकजुट रखा जा सके। 18 जून को होनेवाले राज्यसभा के चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा अपने प्रत्याशी बैजनाथ राम की जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रही है।
जबकि सहयोगी दल कांग्रेस के प्रत्याशी प्रणव झा को लेकर असमंजस बनी हुई है। यही कारण है कि कांग्रेस के नेता हार्स ट्रेडिंग और खरीद फरोख्त जैसी बाते कर रहे हैं। इधर बीजेपी भी अपने गठबंधन के 24 विधायकों की एकजुटता बनाए रखने और बाकी के जरुरी वोटों को लेकर लगातार रणनीति बनाने में लगी है।
यही कारण है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने विधायकों के साथ बैठक कर रणनीति बनाने में लगे हैं। बहरहाल राज्य में राज्यसभा चुनाव को लेकर कई तरह की अटकलों का बाजार गर्म है.. ऐसा पहली बार नहीं है कि राज्य में राज्यसभा के चुनाव को लेकर राजनीतिक गहमा-गहमी तेज हो गई लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या राज्यसभा चुनाव के बहाने राज्य सरकार की राजनीतिक समीकरण पर भी कुछ बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। क्योंकि झारखंड राज्यसभा के चुनाव के समय कई विधायकों का अंतरात्मा जाग जाती है।





