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गर्मी आते ही गांवों में सपेरों का आगमन, बीन की धुन पर सांप का खेल देखने उमड़ते हैं ग्रामीण, हालांकि ये गैरकानूनी है

On: March 8, 2026 1:16 PM
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गर्मी आते ही गांवों में सपेरों का आगमन, बीन की धुन पर सांप का खेल देखने उमड़ते हैं ग्रामीण, हालांकि ये गैरकानूनी है
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गर्मी का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण इलाकों में एक पुरानी परंपरा फिर से जीवंत हो उठती है। इन दिनों कई गांवों में सपेरों का आगमन देखने को मिल रहा है। कंधे पर झोला, हाथ में बीन और साथ में सांप से भरी टोकरी लिए सपेरे जब गांव की गलियों में प्रवेश करते हैं, तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्सुकता बढ़ जाती है।

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सपेरा आमतौर पर गांव के किसी चौक, हाट या खाली मैदान में बैठकर अपनी बीन बजाना शुरू करता है। बीन की मधुर धुन सुनते ही आसपास के लोग धीरे-धीरे वहां जुटने लगते हैं। थोड़ी देर बाद सपेरा अपनी टोकरी खोलता है, जिसमें से सांप बाहर निकलता है। बीन की आवाज के साथ सांप फन फैलाकर झूमने लगता है।

यह नज़ारा देखने के लिए बच्चों की भीड़ लग जाती है, जबकि कुछ लोग डर के कारण थोड़ी दूरी बनाकर खड़े रहते हैं। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ मनोरंजन का साधन ही नहीं, बल्कि एक पारंपरिक कला का प्रदर्शन भी है। कई बुजुर्ग बताते हैं कि पहले के समय में लगभग हर गांव में गर्मी के दिनों में सपेरे आते थे और सांप का खेल दिखाते थे। लोग उन्हें अनाज, चावल या कुछ पैसे देकर सम्मानपूर्वक विदा करते थे।

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सपेरों का कहना है कि यह उनका पुश्तैनी पेशा है और इसी से उनका परिवार चलता है। हालांकि समय के साथ-साथ यह परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। वन्यजीव संरक्षण कानून और बदलती जीवनशैली के कारण अब पहले की तरह हर जगह यह दृश्य देखने को नहीं मिलता। फिर भी जहां-जहां सपेरे पहुंचते हैं, वहां ग्रामीणों के लिए यह एक अलग अनुभव बन जाता है। खासकर बच्चों के लिए सांप को इतने करीब से देखना किसी रोमांच से कम नहीं होता। इस तरह गर्मी के मौसम में सपेरों का गांवों में आगमन आज भी लोगों के लिए कौतूहल और चर्चा का विषय बना रहता है।

हालांकि भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत सपेरों द्वारा सांपों को पकड़ना, पालना, प्रदर्शन करना या उनका प्रदर्शन करना पूरी तरह से अवैध और कानूनन जुर्म है। यह कानून सांपों को वन्यजीव मानकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है और नियमों के उल्लंघन पर 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सपेरों के पारम्परिक ज्ञान का उपयोग सांपों को रिहायशी इलाकों से बचाने और उनके जहर का उपयोग Antivenom दवा बनाने के लिए किया जा सकता है।

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