झारखंड के आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर चुनाव में बड़ी धांधली का आरोप लगा है। यह आरोप वार्ड नंबर 29 की पार्षद और डिप्टी मेयर प्रत्याशी अर्चना सिंह ने लगाया है। अर्चना सिंह ने कहा कि कुल 35 पार्षदों में से उनके पास 20 पार्षदों का समर्थन था, लेकिन इसके बावजूद अंकुर सिंह को विजयी घोषित कर दिया गया।

अंकुर सिंह को 18 वोट मिले, जबकि अर्चना सिंह को 17 वोट मिले। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि 20 पार्षदों के समर्थन के बावजूद उन्हें केवल 17 वोट ही क्यों मिले।
वोटिंग प्रक्रिया पर सवाल उठना इसलिए भी जरूरी हो जाता है क्योंकि वोटिंग के बाद भी अर्चना सिंह के साथ 20 पार्षद खड़े थे। उन्होंने 20 पार्षदों की परेड भी कराई, लेकिन इसके बावजूद अंकुर सिंह को विजयी घोषित कर उन्हें डिप्टी मेयर की शपथ दिला दी गई।
अर्चना सिंह ने फिलहाल इसकी लिखित शिकायत डीसी से की है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह इसकी शिकायत चुनाव आयोग से भी करेंगी और यदि फिर भी न्याय नहीं मिला, तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी।
इस पूरी घटना के दौरान मौके पर मौजूद पत्रकारों से बात करते हुए कुछ पार्षदों ने अंदरखाने गड़बड़ी की आशंका जताई है।
आपको बता दें कि अर्चना सिंह ने पूर्व मेयर विनोद श्रीवास्तव की पत्नी रीता श्रीवास्तव को 747 वोटों के बड़े अंतर से हराकर पार्षद का चुनाव जीता है। अर्चना सिंह आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 29 से दो बार पार्षद रह चुकीं दिवंगत राजमणी देवी की पुत्रवधू हैं।
वहीं अंकुर सिंह वार्ड नंबर 18 से पार्षद हैं और ईचागढ़ के पूर्व विधायक अरविंद सिंह के भतीजे हैं।
इस पूरे प्रकरण पर अर्चना सिंह के समर्थन में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भी डीसी ऑफिस पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस गंभीर मामले पर चुनाव आयोग क्या फैसला करता है और डीसी इस धांधली के आरोप पर क्या कार्रवाई करते हैं।
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