असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस और जेएमएम की राहें अलग हो गई हैं। सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बनने के बाद जेएमएम ने असम विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का फैसला किया है। जेएमएम 19 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।

रविवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के आला अधिकारियों से मिलने दिल्ली गए थे, लेकिन सीटों के तालमेल पर बात नहीं बन सकी। इसके बाद जेएमएम ने अकेले ही चुनाव लड़ने का एलान कर दिया।
हम आपको बता दें कि झारखंड में जेएमएम और कांग्रेस की गठबंधन सरकार है, लेकिन अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पहले बिहार चुनाव में जेएमएम की अनदेखी की गई, उसके बाद झारखंड निकाय चुनाव में कांग्रेस और जेएमएम के रास्ते अलग नजर आए। हालांकि, निकाय चुनाव पार्टी चिह्न पर नहीं लड़े गए थे, लेकिन सभी दलों ने अपने-अपने समर्थित उम्मीदवार उतारे थे। यानी बार-बार जेएमएम और कांग्रेस आमने-सामने आती दिखीं।
कुछ हफ्ते पहले कांग्रेस नेता के. एन. त्रिपाठी ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया था। उन्होंने दावा किया था कि झारखंड निकाय चुनाव के बाद जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन नहीं रहेगा। अब असम चुनाव में सीट शेयरिंग पर सहमति न बनने के बाद प्रदेश में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि झारखंड में कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन कमजोर पड़ चुका है और हल्के झटके से भी यह टूट सकता है।
असम विधानसभा चुनाव में नामांकन की आज आखिरी तारीख है। कुल 126 विधानसभा सीटों में से जेएमएम 19 ऐसी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार रही है, जहां आदिवासियों की संख्या अधिक है। राज्य के करीब 70 लाख आदिवासी और चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों का समर्थन जेएमएम को मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो जेएमएम असम की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर सकती है।
इसे भी पढ़ें- शेयर बाजार फिर हुआ क्रैश, चौतरफा बिकवाली से सेंसेक्स करीब 2000 प्वाइंट लुढ़का





