दुनिया में एक और युद्ध की बहुत जल्द शुरुआत होने की आशंका जताई जा रही है। चीन अपने अत्याधुनिक ड्रोन का जखीरा ताइवान स्ट्रेट के पास जमा कर रहा है। जिसे ताइवान पर संभावित हमले की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव जारी है। वहीं रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
चीन ने ताइवान स्ट्रेट से सटे 6 एयरबेस के पास ड्रोन का जखीरा जमा करना शुरू किया है। इन ड्रोन की बनावट जे-6 फाइटर जेट जैसी बताई जा रही है। माना जा रहा है कि चीन ने जे-6 को ही परिवर्तित कर ड्रोन में तब्दील कर दिया है। जे-6 फाइटर जेट का इस्तेमाल चीन ने सबसे पहले 1960 में किया था।
200 से ज्यादा की संख्या में इस तरह के ड्रोन ताइवान के आसपास के 6 एयरबेस पर तैनात किए गए हैं। ताइवान से सटे इलाकों में चीनी सेना की बढ़ती हलचल को देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि चीन आने वाले दिनों में ताइवान पर हमला कर सकता है। फाइटर जेट से तैयार ये ड्रोन काफी खतरनाक माने जा रहे हैं, क्योंकि चीन इनका इस्तेमाल क्रूज मिसाइल की तरह कर सकता है।
ग्लोबल ड्रोन बाजार में चीन पहले स्थान पर आता है। मिलिट्री ड्रोन टेक्नोलॉजी में चीन ने भारी निवेश किया है। जे-6 से तैयार किए गए ये ड्रोन साधारण नहीं हैं। यूक्रेन जिस तरह रूस के ड्रोन को इंटरसेप्ट कर रहा है, वैसा करना इन ड्रोन के साथ संभव नहीं माना जा रहा है। इन्हें इंटरसेप्ट करने के लिए महंगे मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर मौजूदा जियोपॉलिटिकल माहौल में अगर एक और युद्ध होता है, तो इसकी आंच दूर-दूर तक जाएगी। अमेरिका के लिए इसे रोकना या ताइवान का साथ देना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। क्योंकि वह खुद मध्य पूर्व में उलझा हुआ है।
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