झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख घटक कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जहां एक ओर राज्य में दोनों दल मिलकर सरकार चला रहे हैं, वहीं दूसरी ओर असम विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। इस राजनीतिक स्थिति ने राज्य की गठबंधन सरकार की स्थिरता और आपसी तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जेएमएम के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस को विषैला सांप कहा है। इसके बाद कांग्रेस ने जवाबी हमला करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कांग्रेस को चंदन समझते हैं। फिर जेएमएम का बैकफुट पर जाते हुए जवाब आता है कि सुप्रियो भट्टाचार्य के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस और झामुमो में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत की जाएगी। हालांकि, मुख्यमंत्री इन दिनों असम में चुनावी सभाओं में व्यस्त हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव समाप्त होने के बाद ही इस अहम मुद्दे पर चर्चा संभव हो पाएगी।
के. राजू ने यह भी संकेत दिए कि कांग्रेस राज्य में माइनिंग माफिया और जिला प्रशासन के खिलाफ अपना आंदोलन और तेज करेगी। पार्टी का मानना है कि कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार को और सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
असम में झामुमो के साथ गठबंधन नहीं होने के सवाल पर राजू ने दो टूक कहा कि अब इस विषय पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के चुनावी प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में रिश्तों को लेकर निर्णय लिया जाएगा। इस बयान को राजनीतिक हलकों में कांग्रेस-झामुमो के रिश्तों में बढ़ती दूरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले चाईबासा में आयोजित कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के नौ दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए के राजू ने निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने वाले नेताओं को बधाई दी। उन्होंने जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों के साथ उनकी टीम की भी सराहना की, वहीं हार की जिम्मेदारी खुद लेते हुए संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भी कांग्रेस फिलहाल चुप है। झारखंड की दो सीटों पर होने वाले चुनाव में महागठबंधन को जीत के लिए 54 से अधिक मतों की जरूरत होगी। और इस समय INDI गठबंधन के पास कुल पर्याप्त 56 वोट हैं। जिसमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 शामिल हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम में आमने-सामने की लड़ाई और राज्य में कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर बढ़ते मतभेद, भविष्य में गठबंधन की मजबूती को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि फिलहाल सत्ता में बने रहने की मजबूरी दोनों दलों को एकजुट रखे हुए है। लेकिन अंदरखाने की खींचतान साफ नजर आने लगे हैं।
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