रांची : झारखंड में आने वाले दिनों में राज्यसभा की दो सीटें खाली होने वाली हैं। इसे लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या राज्यसभा सीटों के बंटवारे को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के बीच टकराव की स्थिति बनेगी, या फिर महागठबंधन एकजुट होकर चुनावी रणनीति तय करेगा।

झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि गठबंधन में जो भी फैसला होगा, वह सभी सहयोगी दलों की सहमति और रजामंदी से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व अनुभवी है और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आलाकमान सहमत होगा तो सीटों को लेकर उचित निर्णय लिया जाएगा।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने गठबंधन में किसी तरह की दरार से इनकार किया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर गठबंधन के भीतर बातचीत होगी और सहयोगी दलों के साथ मिलकर सहमति से फैसला लिया जाएगा।
इधर भाजपा ने इस मुद्दे पर महागठबंधन पर निशाना साधा है। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शहदेव ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में वही होगा जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चाहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता के लिए झामुमो पर दबाव बना रही है और कई बार अपमानित होने के बावजूद गठबंधन में बनी हुई है।
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो झारखंड विधानसभा में झामुमो के पास 34 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के पास 16 और भाजपा के पास 21 विधायक हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव महागठबंधन के लिए एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि झामुमो गठबंधन धर्म निभाते हुए सहयोगियों को साथ लेकर आगे बढ़ती है या फिर राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन के भीतर खींचतान खुलकर सामने आती है। फिलहाल राज्य की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है।





