झारखंड सरकार गांवों के विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जमशेदपुर से महज 25 किलोमीटर दूर एक ऐसा गांव है जहां आज भी लोग नाले का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। 15 साल से यहां पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।

ये तस्वीरें हैं जमशेदपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर पटमदा प्रखंड में बसे बोटा गांव की जहां 21वीं सदी में भी लोग बुनियादी जरूरत—पानी—के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांव पहाड़ के ऊपर बसा है और यहां ना कोई चापाकल है, ना कुआं, मजबूरी में ग्रामीण नाले के किनारे चुआ बनाकर उसी गंदे पानी को छानकर पीते हैँ, हर दिन महिलाएं और बच्चे जंगलों के बीच से गुजरकर पानी लाने जाते हैं, जहां जंगली जानवरों—खासकर हाथियों का भी खतरा बना रहता है…
ग्रामीण बताते है की हम बोटा गांव में रहते हैं, हमारे गांव में ना चापाकल है, ना कुआं, हम लोग जंगल से पानी लाकर पीते हैं और उसी से खाना बनाते हैं, खासकर गर्मी में बहुत दिक्कत होती है हम सब मिलकर चुआ से पानी लाते हैं और उसी से पूरा काम चलता है.
ग्रामीणों ने नाले के पास खुद ही एक चुआ खोद रखा है, जहां पानी इकट्ठा कर उसे छानकर हर घर तक पहुंचाया जाता है, हर परिवार को दिनभर के लिए बस एक हांडी पानी ही मिल पाता है, ग्रामीण बताते हैँ की 15 साल से हमारे गांव में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, हम लोग मजबूरी में यही पानी पी रहे हैं.
सरकार भले ही गांव से विकास की बात करती हो
लेकिन बोटा गांव की तस्वीरें इन दावों की पोल खोल रही हैं, जहां आज भी लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, जिले के उपायुक्त राजीव रंजन से जब tv45 ने इस मुद्दे से बातचीत की तो उन्होने बताया की हमें इसकी जानकारी नहीं थी, जल्द ही टीम भेजकर गांव का निरीक्षण कराया जाएगा और पानी की व्यवस्था की जाएगी. अब देखना होगा की किस प्रशासन किस तरह की एक्शन लेती है





