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NAXALI संगठन में बढ़ी अंदरूनी दरार! जानिए कैसे किया 27 नक्सलियों ने सरेंडर

On: May 26, 2026 7:30 PM
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Jharkhand में दिखा नक्सलवाद मुक्त का असर: 27 नक्सलीओं ने किया आत्मसमर्पण
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झारखंड के NAXALI संगठन  मेंं दरार  पड़ता नजर आ रहा है! झारखंड में पुलिस मुख्यालय में हाल ही में 27 नक्सलियों के एक साथ समर्पण करने पर पुलिस की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। लेकिन दूसरी ओर देखा जाए और नक्सलियों की अगर माने तो नक्सली संगठन के अंदर भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मायावती संगठन जिस नीति और सिद्धांत के लिए बनाया गया था। अब उसे पर दरार पड़ती नजर आ रही। शायद यही वजह हो रहा है कि इतनी ज्यादा संख्या में नक्सली आत्म समर्पण कर रहे हैं और मुख्य धारा की ओर लौटने को विवश है।

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झारखंड के NAXALI संगठन  को 1970 और 1980 के दशक में याद कीजिए ये वो झारखंड था जिसने दिन दहाड़े नक्सलीओं का आंतक देखा । झारखंड एक ऐसा राज्य था जिसने अपने प्रांगण में हजारों नक्सलियों को पन्नाह दिया है। जब झारखंड में नक्सली आंदोलन की शुरुआत हुई थी। उस वक्त  झारखंड में जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ नक्सलवादी आंदोलन की शुरूआत हुई थी। नक्सलीयो ने जमींदारों को अपना निशाना बनाया। इस दौरान कितने लोगों के  घरों में आगजनी हुई, जमीन छिन कर भूमिहीनों को बांटा गया। ऐसे में नक्सली आंदोलन से लोगों का जुड़ाव होते चला गया। समय दर समय बदलता गया और नक्सलियों की स्थिति झारखंड में इतनी मजबूत हो गई थी कि सारंडा, सरयू, बूढ़ा और झूमरा को उन्होंने अपने प्रशिक्षण स्थल के रूप में विकसित कर लिया। नक्सलियों के नए रंग रूट की बहाली तक इन क्षेत्रों से की जाने लगी।

NAXALI ने अपने संगठन को मजबूत करने के लिए ठेकेदारों माइंस कारोबारी से संगठन ने पैसा वसूलना शुरू किया। समय के साथ-साथ यह संगठन करोड़ों की उगाही करने लगा। नक्सलियों में यहीं से मतभेद होना शुरू हो गया और जिस समिति सिद्धांत के लिए बनाया गया था कई लोग उससे दूर हटने लगे। वर्तमान में सिद्धांत की कोई जगह नहीं बची है। ऊपर बैठ बड़े नेताओं का आदेश ही कानून बनता जा रहा है। संगठन तानाशाही की तरह चल रहा है। इसके अलावा सुरक्षा बलों की ओर से नक्सलियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है घेराबंदी की जा रही है और यही वजह है कि अपनी सुरक्षा को देखते हुए कई नक्सली समर्पण और मुख्य धारा में लौटने को विवश हो रहे हैं।

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