पद्मिनी एकादशी जिसे कमला एकादशी या पुरुषोत्तम एकादशी भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी एकादशी मानी जाती है। यह पुरुषोत्तम मास के शुक्ल पक्ष में आती है। पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास लगभग हर 3 साल में एक बार आता है इसलिए यह एकादशी भी विशेष और दुर्लभ मानी जाती है।

पद्मिनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?
यह व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्णी की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से पापों का नाश होता है। धन, सुख और समृद्धि मिलती है।परिवार में शांति आती है।मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग खुलता है। संतान, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
इस एकादशी का नाम कमला एकादशी इसलिए पड़ा क्योंकि माता लक्ष्मी को “कमला” भी कहा जाता है।
इस व्रत को रखने से क्या फल मिलता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हजारों यज्ञों और दानों के बराबर पुण्य मिलता है। जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। आर्थिक परेशानियों में राहत मिलती है। मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। भगवान विष्णु और लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से यह व्रत करता है उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में महिष्मती नगरी में राजा कृतवीर्य का शासन था। उनकी पत्नी का नाम पद्मिनी था। राजा के पास सब कुछ था लेकिन संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए राजा और रानी ने वर्षों तक कठोर तपस्या की लेकिन सफलता नहीं मिली।
एक दिन वे महर्षि अनुसूया के आश्रम पहुंचे। माता अनुसूया ने रानी पद्मिनी को अधिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। रानी ने पूरे नियम और श्रद्धा से यह व्रत किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और वरदान दिया। बाद में रानी को एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम कार्तवीर्य अर्जुन पड़ा। वह आगे चलकर महान और पराक्रमी राजा बना। इसी कारण इस एकादशी को “पद्मिनी एकादशी” कहा गया और इसे संतान, सुख और समृद्धि देने वाला व्रत माना गया।
अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है। इसलिए इस महीने में आने वाली एकादशी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि इस दिन किया गया जप, तप, दान और पूजा अक्षय फल देता है।
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