परिमल नाथवानी के नामांकन cancellation करने को लेकर पक्ष- विपक्ष में जुबानी जंग तेज हो गयी है।इसी बीच धनबाद के सांसद ढुलू महतो ने मीडिया से बात चीत में कहा कि परिमल नाथवानी की जीत पक्की है, वही स्वास्थ मंत्री इंरफान अंसारी अपने बयान में कहा है कि परिमल नाथवानी का नामांकन पहले दीन ही cancellation करना चाहिए था।और अब निर्दलीय राज्यसभा प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को वैध घोषित किए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जिस दिन परिमल नाथवानी ने नामांकन दाखिल किया था, उसी दिन उनके सभी दस्तावेजों की जांच की गई थी। उन्होंने कहा कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेजों का निरीक्षण किया जाता है और उसके बाद ही नामांकन को वैध माना जाता है।

उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कोई आरक्षित सीट नहीं होती है। केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए नामांकन शुल्क में कुछ अंतर होता है, लेकिन इन सभी पहलुओं की जांच पहले ही की जा चुकी थी। इसी आधार पर 8 जून को परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को वैध माना गया था।
बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने जानबूझकर इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले से ही अंदेशा है कि वह चुनाव में बुरी तरह हारने वाली है, इसलिए हार के बाद बहाना बनाने की तैयारी अभी से शुरू कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की यह पुरानी आदत रही है कि चुनाव में हार मिलने पर वे ईवीएम, चुनाव आयोग या अन्य संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं। कभी ईवीएम को दोष दिया जाता है, कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाए जाते हैं और कभी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए जाते हैं। इस बार भी कांग्रेस उसी रणनीति पर काम कर रही है और हार के बाद बहाना बनाने का रास्ता तलाश रही है।
इस चुनाव में देखना होगा कि दो सिट पर तीन उम्मिदवार है और पक्ष- विपक्ष अपनी – अपनी तैयारी में लग गई है 18 जून को चुनावी नतीजे भी आ जाएगें फैसला किस पक्ष में होता है । जीत कर आखिर कौन बनेगा राज्य सभा का सदस्य फिलहाल ये अभी इंतजार का बिषय।
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