मिडिल ईस्ट के war और वैश्विक उथल-पुथल के बीच झारखंड के रामगढ़ से एक बड़ी ही खूबसूरत तस्वीर दिखी है। जो दिल को सुकून देने वाली और war के बीच हर किसानों की ये मेहनत भारतीय को गौरवान्वित करने वाला माना जा रहा है। war की कड़वाहट के बीच हमारे किसानों की मेहनत “आम की मिठास”बनकर दुनिया में घुल रही है। रामगढ़ जिले से पहले दुबई तो अब यूके लंदन आम की खेप रवाना हुई है,रामगढ़ के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने से न सिर्फ यहां के किसानों को आर्थिक मुनाफे हो रही है, बल्कि उनके चेहरे पर चमक भी ला दी है, क्योंकि जहां स्थानीय स्तर पर बिकने वाला आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने लगा है।

दरअसल रामगढ़ जिले में आम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों से बेहतर बागवानी के लिए काम किया गया था। जिसका परिणाम अब नजर आ रहा है। रामगढ़ डीसी ऋतुराज ने आम की दूसरी खेप दो टन यानी 2000 किलो यूके लंदन के लिए रवाना किया है, इससे पहले उन्होंने चार टन 4000 किलो 4 जून को दुबई के लिए रवाना किया था।
आम की बागानों की संख्या 250 से अधिक
रामगढ़ जिले में इस समय 250 से अधिक आम के बागान बताए जा रहे हैं और इस सीजन में करीब 100 टन से ज्यादा उत्पादन हो रहा है. जिले के गोला दुलमी और मांडू प्रखंड में आम की अच्छी उत्पादन हुई है। स्थानीय किसानों की मेहनत और प्रशासन के सहयोग से यहां तैयार आम को विदेशी बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई है। इससे किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि उन्हें बेहतर मार्केटिंग के मौके भी मिल सकेंगे। स्थानीय स्तर पर जो कम दामों में बिकने वाला आम जब पाउंड और दिरहम की वैल्यू के साथ किसानों की जेब मजबूत करेगा, तो किसानों की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होना तय है।
रामगढ़ के इन आमों को ‘आम्रपाली’ ब्रांड नाम के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारा जा रहा है। एक निजी कंपनी किसानों से सीधे खरीद कर निर्यात प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है, इस तरह किसानों को सीधे बाजार से जुड़ने का मौका मिल रहा है।
जाहिर है रामगढ़ जिले से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों के लिए लगातार आम की खेप रवाना हो रही हो रही है। भारत से जाने वाली आम की यह मिठास ब्रिटेन और यूएई जैसे देशों के साथ हमारे रिश्तों को और अधिक मधुर बनाएगी।
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