झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और राज्य के बीजेपी Vice President भानु प्रताप शाही दुमका पहुंचे। बता दें पहुचंने के बाद सर्किट हाउस में उन्होंने मीडिया से कई अहम मुद्दों पर बात की। बातचीत के दौरान Vice President ने मोदी सरकार की तारिफ करते हुए उनकी उपलब्धियों को गिनाया और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। Vice President और पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने कहा कि संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा बहुत गंभीर है। उन्होंने इसे इलाके की आत्मा पर चोट बताया और कहा कि इससे वहां की आबादी का ढांचा बदल रहा है। उन्होंने निजी फायदे के लिए घुसपैठियों को पनाह देने वालों को देशद्रोही कहा।

शाही ने बताया कि 1960 के दशक की जनगणना में आदिवासियों की आबादी 46% थी, जो 2011 की जनगणना में घटकर 26% रह गई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही हाल रहा, तो अगले 60 सालों में आदिवासी आबादी पूरी तरह खत्म हो सकती है। उन्होंने राज्य सरकार से इस मुद्दे को संवेदनशीलता से लेने, आदिवासी समुदाय की रक्षा करने और उनकी आबादी बढ़ाने के लिए रणनीतियाँ बनाने की अपील की। उन्होंने आदिवासी महिलाओं से कम से कम पाँच-छह बच्चे पैदा करने की भी व्यक्तिगत अपील की। झारखंड सरकार पर निशाना साधते हुए, बीजेपी के राज्य उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने आरोप लगाया कि सामान्य कर्मचारियों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक के तबादले और पोस्टिंग पैसे के बदले हो रहे हैं। नतीजतन, गलत कामों के खिलाफ शिकायत करने का कोई रास्ता नहीं बचा है और कोई भी जनता के प्रति जवाबदेह नहीं दिखता।
शाही ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 12 सालों में झारखंड सरकार को काफी फंड दिया है, लेकिन जिन योजनाओं के लिए यह फंड दिया गया था, उन्हीं योजनाओं के जरिए इसे हड़प लिया गया। उन्होंने दावा किया कि सिर्फ ‘नल-जल’ योजना की जाँच से ही पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर, विभाग के पूर्व सचिव और कई ठेकेदार जेल जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन केंद्र से बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये की माँग तो कर रहे हैं, लेकिन इस दावे को साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं दे पाए हैं। यह सब जनता को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही ने दुमका में फूलो झानो मेडिकल कॉलेज की नई इमारत का नाम बदलकर “सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज” करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार उन हालात के बारे में साफ़-साफ़ बताए जिनके तहत नाम बदला गया। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी यह बताएं कि देश की आज़ादी के लिए लड़ने वाली स्वतंत्रता सेनानी फूलो झानो का नाम क्यों हटाया गया। शाही ने ज़ोर देकर कहा कि इरफ़ान अंसारी को जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।उन्होंने कहा “यह बांग्लादेश नहीं है। अगर वह यहां काम करना चाहते हैं, तो उन्हें झारखंड के लोगों की भावनाओं का सम्मान करना होगा; वरना, उन्हें अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर बांग्लादेश चले जाना चाहिए।”
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बीजेपी नेता चंपई सोरेन ने भी फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल का नाम बदलने पर कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि अगर 30 जून तक नाम वापस नहीं रखा गया, तो हज़ारों लोग आकर साइनबोर्ड उखाड़ फेंकेंगे।
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