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धनबाद के IIT (ISM) में “ब्रेकिंग बैरियर्स, बिल्डिंग इंक्लूसिव स्पेस चैलेंज एंड स्ट्रैटेजी पर किया गया चर्चा : प्रोफेसर फॉक्स रहे मुख्य अतिथि

On: June 15, 2026 2:41 PM
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धनबाद के IIT (ISM) में "ब्रेकिंग बैरियर्स, बिल्डिंग इंक्लूसिव स्पेस चैलेंज एंड स्ट्रेटेजीज पर किया गया चर्चा : प्रोफेसर फॉक्स रहे मुख्य अतिथि
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IIT (ISM) धनबाद में “ब्रेकिंग बैरियर्स, बिल्डिंग इंक्लूसिव स्पेस चैलेंज एंड स्ट्रैटेजी” विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गाया। धनबाद के IIT (ISM)  के सम्मेलन में अमेरिकन प्रोफेसर फॉक्स ने मुख्य अतिथि  के रूप हिस्सा लिया – लेक्चर देते हुए प्रोफ़ेसर फ़ॉक्स ने कहा कि जेंडर को सिर्फ़ महिलाओं के नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। IIT (ISM) में बताया गया पुरुष, ट्रांसजेंडर, इंटरसेक्स और दूसरी जेंडर पहचान वाले लोग भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जाति, वर्ग, धर्म, विकलांगता और दूसरे सामाजिक कारक असमानता को बढ़ाते हैं, इसलिए इन सभी पहलुओं पर समग्र रूप से ध्यान देना ज़रूरी है।

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USA की ब्रिजवाटर स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर डायना फ़ॉक्स ने कहा कि जेंडर इक्वालिटी  सिर्फ़ सामाजिक न्याय का मामला नहीं है, बल्कि यह सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास), आर्थिक प्रगति और अच्छे गवर्नेंस के लिए एक ज़रूरी शर्त है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक समावेशी और न्यायपूर्ण समाज बनाने के लिए अलग-अलग समुदायों, संस्थानों और लोगों के बीच पार्टनरशिप को मजबूत करना जरूरी है।

समानता और समान अवसर के बीच फ़र्क बताते हुए उन्होंने कहा कि सभी को एक जैसे अवसर देना काफ़ी नहीं है। असली समानता तब होती है जब अलग-अलग चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों को उनकी खास ज़रूरतों के हिसाब से मदद दी जाए।

प्रोफेसर फॉक्स ने क्लाइमेट चेंज (जलवायु परिवर्तन), फ़ूड सिक्योरिटी (खाद्य सुरक्षा), जल प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी और लीडरशिप के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की दिशा में की गई हर कोशिश असल में क्लाइमेट जस्टिस (जलवायु न्याय) के मकसद को मज़बूत करती है।

महिलाओं के बिना पैसे वाले घरेलू काम का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि खाना पकाने और बच्चों व बुज़ुर्गों की देखभाल जैसे काम अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं, फिर भी अक्सर उन्हें पहचान नहीं मिलती। उन्होंने शिक्षा, रोज़गार, सुरक्षित सार्वजनिक सुविधाओं और फ़ैसले लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं के लिए ज़्यादा अवसरों की वकालत की।

संभावित समाधानों पर चर्चा करते हुए प्रोफेसर फॉक्स ने एकेडमिक संस्थानों, नीति निर्माताओं, कॉर्पोरेट सेक्टर और ज़मीनी स्तर के संगठनों के बीच मज़बूत पार्टनरशिप की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि समाधान सिर्फ़ समुदाय के लिए नहीं, बल्कि समुदाय के साथ मिलकर तैयार किए जाने चाहिए।

इस कार्यक्रम का आयोजन डीन (Corporate Communications) प्रोफ़ेसर रजनी सिंह ने किया, जिन्होंने गेस्ट स्पीकर का परिचय दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में फ़ैकल्टी सदस्य, रिसर्चर और छात्र शामिल हुए। लेक्चर के बाद सवाल-जवाब का सत्र भी हुआ।

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