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हर घर नल, हर घर जल’ योजना ठप! , करोड़ो रूपये खर्च के बाद भी पानी (water) की टंकी खाली

On: June 26, 2026 2:30 PM
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हर घर नल, हर घर जल’ योजना ठप! , करोड़ो रूपये खर्च के बाद भी पानी (water) की टंकी खाली
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सरकार द्वारा पानी की तरह पैसा बहा कर लोगों को शुद्ध पेयजल (water) आपूर्ति कराने के मकसद से चलाई जा रही अति महत्वाकांक्षी योजना ‘हर घर नल, हर घर जल’ इनदिनों अधिकतर जगहों में दम घुटते नजर आ रही है।आपको बता दें कि इस योजना के तहत मसलिया प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न जगहों में बेशक लाखो करोड़ो रूपये खर्च कर पानी (water ) टंकी तो लगवाया गया है।परंतु इसकी देख रेख व मरम्मत के लिए लगाए गए कर्मी अपने मर्जी में रहते है।जिसके कारण अधिकतर समय लोगों को पानी (water) नही मिलती है।आज के दिनों में भी अधिकतर जगहों के लोग पानी के लिए तरस रहे है।

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ताजा मामला मसलिया प्रखंड क्षेत्र के नयाडीह पंचायत अंतर्गत आदिवासी बहुल कोलगी गांव का है।जहां यह योजना पूरी तरह फेल नजर आ रही है। योजना शुरू हुए ढाई साल से अधिक समय बीत चुका है।परन्तु गांव के 76 परिवारों के लगभग 295 सदस्यों को आज तक नल से एक बूंद पानी नहीं मिली है। अधूरे जलमीनार और बंद पड़े बोरिंग के कारण ग्रामीण भीषण पेयजल संकट झेल रहे हैं।वर्ष 2023 में रबी टुडू के घर के सामने अर्ध निर्मित सिमेंटेट जलमीनार का काम आज तक अधूरा है।

ग्रामीण मुंशी टुडू, बाबुशल टुडू, कालीशल टुडू, बाणे सोरेन, मंशा टुडू, शोमबरी मरांडी, श्रीमती मरांडी, सुकरमुनी मुर्मू और जोशोदा मरांडी ने बताया कि वर्ष 2023 में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा गांव में दो जलमीनार स्थापित किए थे। पहला सीमेंटेड जलमीनार रबिलाल टुडू के घर के सामने और दूसरा 5 हजार लीटर क्षमता का टंकी युक्त जलमीनार बबलू हांसदा के घर के सामने लगाया गया। इसके साथ ही पूरे गांव में पाइपलाइन बिछाकर घर-घर नल कनेक्शन भी दे दिए गए। लेकिन हकीकत यह है, कि नल लगाने के ढाई साल बाद भी उनमें पानी नहीं आया। सिमेंटेट जलमीनार में आज तक सोलर पैनल तक नही लगाया गया है,और ना ही टंकी तक चढ़ने के लिए सीढ़ी लगाई गई है। ठेकेदार जैसे तैसे काम अधूरा छोड़कर चला गया।वहीं बबलू हांसदा के घर के सामने लगे जलमीनार की स्थिति भी बदतर है।

ग्रामीणों के अनुसार बोरिंग में समरसेबल पंप लगाने के दौरान ही उसमें तकनीकी खराबी आ गई। मिस्त्री समरसेबल को मरम्मत के लिए खोलकर ले गए, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी न तो समरसेबल वापस आया और न ही मिस्त्री लौटे। नतीजा, लाखों की लागत से बना जलमीनार शोभा का बस्तु बनकर रह गया। हालांकि ग्रामीण गांव में लगे चापानल से पीने के लिए पानी लाते है और स्नान आदि के लिए आधा किलोमीटर दूर तालाब जाना पड़ता है। पानी की सुविधा न होने से गांव की महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। गर्मी में पुराने चापाकल सूख जाते हैं और बरसात में कुओं का पानी दूषित हो जाता है।वहीं इधर इस संबंध में संवेदक विकाश वर्मा से बात करने पर उन्होंने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि तीन चार साल से मुझे पैसा नही मिला है।फिर भी मैं एक साप्ताह के अंदर जलमीनार को ठीक करा देंगे

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