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मीठी शहद (honey)से शानदार कामयाबी , देश के कोने – कोने पहुंच रहा है झारखंडी शहद

On: July 7, 2026 1:25 PM
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मीठी शहद (honey) से शानदार कमायबी , देश के कोने - कोने पहुंच रहा है झारखंडी शहद
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कोडरमा के डोमचांच के रहने वाले सचिन प्रजापति ने 15 तरह के शहद से मीठी (honey) कामयाबी हासिल करते हुए लाखों का कारोबार खड़ा किया है। अलग अलग फ्लेवर में निर्मित शहद (honey) देशभर में पहुंच रहा है। एक छोटे से प्रयास से शुरू हुई सचिन की यह यात्रा आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। आमतौर पर लोग मधुमक्खी से तैयार एक-दो प्रकार के शहद (honey) के बारे में ही जानते है, लेकिन कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड के महथाडीह निवासी युवा उद्यमी सचिन प्रजापति ने इस धारणा को बदल दिया है। सचिन आज 15 अलग-अलग किस्म के शहद (honey)  तैयार कर न केवल लाखों रुपये का कारोबार कर रहे हैं, बल्कि जिले के युवाओं के लिए स्वरोजगार की नई मिसाल भी बन गए हैं। ‘उमा बी फर्म’ के नाम से स्थापित अपनी कंपनी के माध्यम से सचिन आनलाइन और आफलाइन दोनों माध्यमों से शहद की बिक्री कर रहे हैं।

यहां तुलसी हनी, मोरिंगा हनी, कश्मीरी हनी, ब्लैक फॉरेस्ट, बेरी हनी, रेड फॉरेस्ट हनी, लीची हनी, सरसों हनी, करंज हनी, लाल घास हनी, नीम हनी और जामुन हनी समेत 15 प्रकार के शहद उपलब्ध हैं। इनकी कीमत 500 से 1400 रुपये प्रति किलोग्राम तक है। सचिन बताते हैं कि मधुमक्खी पालन और शहद संग्रहण का कार्य मौसम और फूलों की उपलब्धता के अनुसार बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में किया जाता है, जबकि शहद की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और डिलीवरी उनके डोमचांच स्थित आवास से होती है। शहद की बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत 35 प्रतिशत अनुदान पर साढ़े चार लाख रुपये की लागत से प्रोसेसिंग प्लांट भी स्थापित किया है। हालांकि, ग्राहकों की सबसे अधिक मांग बिना प्रोसेस वाले प्राकृतिक शहद की रहती है।

इस सफलता की शुरुआत महज एक लाख रुपये से हुई थी। सचिन की मां उमा देवी बताती हैं कि उन्होंने बेटे को पढ़ा-लिखाकर नौकरी करते देखने का सपना देखा था। बीसीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब सचिन ने व्यवसाय शुरू करने के लिए उनसे एक लाख रुपये मांगे, तो उन्होंने बेटे पर भरोसा जताते हुए पैसे दे दिए। उन्हीं रुपयों से सचिन ने 15 बक्से खरीदकर मधुमक्खी पालन शुरू किया। आज बेटे की सफलता पर उन्हें गर्व है। यही कारण है कि सचिन ने अपनी कंपनी का नाम भी मां के नाम पर ‘उमा बी फार्म’ रखा है।

पढ़ाई के दौरान ही सचिन ने यूट्यूब देखकर मधुमक्खी पालन की जानकारी जुटाई। इसके बाद पटना स्थित केवीआईसी में पांच दिनों का प्रशिक्षण लिया और फिर पुणे के सीबीआरटीआई में एक महीने का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अलग-अलग राज्यों में जाकर इस व्यवसाय की बारीकियां सीखीं और फिर अपने जिले में कारोबार शुरू किया।
आज उनके उत्पादों की मांग देश के विभिन्न राज्यों से आती है।

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