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सड़कें टूटी,मिट्टी के घर, आदिवासियों की जरूरतों का किया जा रहा है मर्डर! सरकार कर रही है योजनाओं (welfare schemes) का दवा

On: July 10, 2026 3:42 PM
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सड़कें टूटी,मिट्टी के घर, आदिवासियों की जरूरतों का किया जा रहा है मर्डर! सरकार कर रही है योजनाओं (welfare schemes) का दवा
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क्या आपने ऐसा गांव देखा है, जहां आज भी विकास पहुंचने से पहले ही रास्ता भटक जाता है? जहां टूटी सड़कें हैं, मिट्टी के घर हैं, मोबाइल में नेटवर्क नहीं और सरकारी योजनाएं(welfare schemes)  सिर्फ कागज़ों तक सीमित हैं। झारखंड में आदिवासी सरकार होने के दावों के बीच आदिवासियों की यह तस्वीर उन सभी दावों का पोल खोल रही है। आजादी के दशकों बाद भी यहां सरकारी योजनाएं (welfare schemes)  पूरी तरह नहीं पहुंच सकी। गांव तक पहुंचने वाला रास्ता लोगों की परेशानी का सबूत है। झारखंड में जल, जंगल और जमीन की बात करने वाली हेमंत की सरकार है,  झारखंड में आदिवासियों के लिए योजनाओं सरकारी योजनाएं(welfare schemes)  की बौछार है। लेकिन एक तस्वीर इनके वादों के सच को खोखला कर देगी।

धनबाद जिसे कोल कैपिटल भी कहा जाता है, जी हां खनिज संपदाओं से परिपूर्ण धनबाद का वह इलाका जहां कभी नक्सलियों का दबदबा हुआ करता था। आज हालात बदले हैं, लेकिन विकास अब भी यहां पहुंचने का रास्ता तलाश रहा है। धनबाद मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर टुंडी प्रखंड के बाघमारा गांव का भेलवाड़ा टोला जहां करीब 40 आदिवासी परिवारों का00 यह गांव आज भी टूटी और कच्ची सड़क, मिट्टी के घर और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जिंदगी गुजारने को मजबूर है। गांव में मोबाइल नेटवर्क तक ढंग से नहीं आता, जिससे लोगों का दुनिया से संपर्क भी अक्सर कट जाता है।

सबसे बड़ी परेशानी सड़क की है। बारिश के दिनों में रास्ता दलदल में बदल जाता है। बीमार पड़ने पर मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। बाजार जाने, बच्चों को स्कूल भेजने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए भी ग्रामीणों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि नेता और जनप्रतिनिधि चुनाव के समय ही दिखाई देते है।सरकारी योजनाओं के यह आदिवासी गांव आज अपने आप को अपेक्षित महसूस कर रही है।बहरहाल आदिवासी विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच खाई कितनी गहरी है। इसकी तस्वीर धनबाद का यह गांव बयां कर रहा है। अब सवाल सरकार और जनप्रतिनिधियों से है… आखिर इन 40 आदिवासी परिवारों तक विकास की किरण कब पहुंचेगी।

इसे भी पढ़े – BJP ने हेमंत सरकार ने बोला तीखा हमला, प्रवक्ता दीनदयाल (Dindayal) ने कहा- 90 हजार करोड़ रुपये का है मामला

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