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स्टेकहोल्डर्स (Stakeholder) कंसल्टेशन 2026 को लेकर राजनिति गरमाई, दिल्ली में फिर से बेच फिर बेचे जा रहे है निवेश

On: July 13, 2026 5:37 PM
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स्टेकहोल्डर्स (Stakeholder) कंसल्टेशन 2026 को लेकर राजनिति गरमाई, दिल्ली में फिर से बेच फिर बेचे जा रहे है निवेश
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिल्ली में आयोजित स्टेकहोल्डर्स (Stakeholder) कंसल्टेशन 2026 के दौरान निवेशकों को झारखंड में उद्योग लगाने ने निमंत्रण पर झारखंड भाजपा ने हमला बोला है।झारखंड भाजपा ने स्टेकहोल्डर्स (Stakeholder) कंसल्टेशन 2026 को लेकर कहा मुख्यमंत्री ठीक 7 महीने पहले भी यूके और दावोस में बिजनेस मीट के दौरान कई उद्यमियों को झारखंड में उद्योग लगाने को लेकर आमंत्रित किए थे और इस बार भी वही उद्यमियों के साथ मुख्यमंत्री ने एमओयू किया है,भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा सरकार पुराने निवेश प्रस्तावों की रीपैकेजिंग कर नई घोषणा के रूप में प्रस्तुत की है प्रतुल ने कहा स्टेकहोल्डर्स (Stakeholder) कंसल्टेशन 2026 को लेकर दावोस में घोषित निवेश को दिल्ली में फिर से बेचने की कोशिश की गई है।

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वही भाजपा के सवालों पर सत्ताधारी दल ने सरकार का बचाओ करते हुए कहा कि झारखंड के भाजपा अपने पुराने कालखंड को भूल गए कि अरबो रुपए खर्च कर हाथी उड़ाने का काम किया था,कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने कहा हमारी सरकार का विजन साफ है और झारखंड में विकास की नई लकीरें हमारी सरकार ने खींच दी है,उन्होंने कहा भाजपा बेवजह विकास की राह में अड़चन ना डाले।

बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को नई दिल्ली में दो दिन के ‘नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन’ (राष्ट्रीय हितधारक परामर्श) का उद्घाटन किया था। यह कार्यक्रम झारखंड सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी, उद्योग और पर्यटन विभागों की संयुक्त देखरेख में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के पहले दिन सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और भविष्य की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस कार्यक्रम में भारत और विदेशों से औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों, IT कंपनियों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान अब सिर्फ़ खनिज संपदा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए; बल्कि राज्य को ज्ञान और इनोवेशन के केंद्र के तौर पर खुद को स्थापित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान सिर्फ़ ‘माइन्स’ (खदानों) से नहीं, बल्कि ‘माइंड्स’ (बुद्धि-क्षमता) से भी होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि संसाधनों को रिसर्च के साथ, खनन को इनोवेशन के साथ और विकास को समावेशी विकास के साथ जोड़ना राज्य की प्राथमिकता है।

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