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परीक्षा व्यवस्था पर सियासी संग्राम: दिल्ली से झारखंड तक घिरी सरकारें, NEET और JPSC बने राजनीतिक हथियार

On: July 22, 2026 6:42 PM
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परीक्षा व्यवस्था पर सियासी संग्राम: दिल्ली से झारखंड तक घिरी सरकारें, NEET और JPSC बने राजनीतिक हथियार
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देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर उठे सवाल अब सिर्फ छात्रों की चिंता तक सीमित नहीं रह गए हैं  बल्कि यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। एक ओर केंद्र की बीजेपी सरकार NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष के निशाने पर है वहीं दूसरी ओर झारखंड में JPSC परीक्षा को लेकर बीजेपी ने राज्य की जेएमएम-कांग्रेस महागठबंधन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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परीक्षा व्यवस्था को लेकर देश की राजनीति में ऐसा टकराव देखने को मिल रहा है जहां सत्ता और विपक्ष एक-दूसरे पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं। दिल्ली में पिछले तीन दिनों से परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर हुए राजनीतिक प्रदर्शन और नेताओं के बयानों के बाद अब झारखंड में भी यह मुद्दा गरमा गया है।

NEET विवाद पर केंद्र सरकार को घेर रहा विपक्ष, कटघरे में भाजपा 

NEET परीक्षा को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। CJP और विपक्षी दलों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही और लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने महत्वपूर्ण परीक्षा तंत्र में किसी भी तरह की गड़बड़ी स्वीकार्य नहीं की जा सकती।

सोनम वांगचुक के अनशन के बाद हजारों की संख्या में स्टूडेंट्स का संसद भवन के बाहर प्रदर्शन और पीएम आवास के बाहर राहुल-प्रियंका के धरने से लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस मामले को संसद से लेकर सड़क तक उठाया। विपक्ष की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लगातार की जा रही है। विपक्ष का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सरकार की है और अगर छात्रों का भरोसा टूटता है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

वहीं केंद्र सरकार का पक्ष रहा है कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों की जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी कहा है कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बीजेपी ने पलटवार करते हुए झारखंड में JPSC को बनाया मुद्दा, कटघरे में महागठबंधन सरकार

जहां विपक्ष केंद्र सरकार को NEET मामले में घेर रहा है वहीं झारखंड बीजेपी ने JPSC परीक्षा को लेकर राज्य सरकार पर हमला तेज कर दिया है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है।

बीजेपी का कहना है कि जिस तरह केंद्र सरकार से NEET मामले में जवाब मांगा जा रहा है उसी तरह झारखंड सरकार को भी JPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर जवाब देना चाहिए।

झारखंड लोक सेवा आयोग यानीJPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के पीटी परिणाम में कथित गड़बड़ी के आरोपों पर CID और रांची पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए TDPL के दफ्तर को पूरी

JPSC की मुख्य परीक्षा को भी रद्द कर दिया गया है। 25,26 और 27 जुलाई को होनी थी मुख्य परीक्षा।

झारखंड बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि राज्य में परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं और सरकार को युवाओं के हित में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। वहीं जेएमएम-कांग्रेस सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया जाता रहा है। झारखंड प्रदेश सरकार दावा कर रही है कि किसी भी तरह की अनियमितता के खिलाफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जीरे टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।

युवाओं का मुद्दा बना चुनावी राजनीति का केंद्र

देश में बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं की संख्या को देखते हुए परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है। NEET और JPSC जैसे मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि करोड़ों छात्रों का भविष्य तय करने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता और भरोसा कैसे कायम रखा जाए।

राजनीतिक दल इस मुद्दे को लेकर अपनी-अपनी रोटी सेक रहे हैं। विपक्षी पार्टियां जहां केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा हैं वहीं झारखंड बीजेपी राज्य सरकार पर सवाल उठा रही है।

दिल्ली से रांची तक एक ही सवाल परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा कैसे लौटे?

दिल्ली में NEET विवाद को लेकर हुए राजनीतिक घटनाक्रम और झारखंड में JPSC को लेकर उठे सवालों ने एक बात साफ कर दी है कि परीक्षा व्यवस्था अब केवल प्रशासनिक विषय नहीं रह गई है  बल्कि यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

देश के लाखों छात्र चाहते हैं कि परीक्षाएं निष्पक्ष हों, प्रक्रिया पारदर्शी हों और मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के साथ न्याय हो। आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य सरकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर परीक्षा प्रणाली में ऐसा भरोसा कायम किया जाए  जिससे युवाओं को अपने भविष्य को लेकर किसी तरह की आशंका न रहे।

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