देश में प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने लोकसभा में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने से जुड़ा कड़ा विधेयक पेश किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को सदन में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। प्रस्तावित प्रावधानों के तहत परीक्षा प्रणाली से खिलवाड़ करने वाले गिरोह, निजी एजेंसियों, उनके शीर्ष अधिकारियों और दोषी सरकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ किया गया है।

बिल में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की मिलीभगत, प्रश्नपत्र लीक, डिजिटल छेड़छाड़ और अभ्यर्थियों को अवैध लाभ पहुंचाने जैसी गतिविधियों पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य लाखों ईमानदार परीक्षार्थियों के हितों की रक्षा करना और परीक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा मजबूत करना है।
सूत्रों की मानें तो नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर लोकसभा में जारी गतिरोध दूर करने पर सहमति बन गई है और मंगलवार से सदन में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हो सकती है।
निजी परीक्षा एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई, गलती हुई तो भरना होगा पूरा खर्च
परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी कंपनियों और सेवा प्रदाताओं (Service Providers) के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। यदि किसी कंपनी की लापरवाही, सुरक्षा चूक या मिलीभगत के कारण परीक्षा रद्द होती है, तो दोबारा परीक्षा आयोजित कराने का पूरा खर्च उसी कंपनी से वसूला जाएगा। इसके साथ ही दोषी पाए जाने पर कंपनी की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
ऐसी एजेंसियों को केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं उठाना पड़ेगा, बल्कि भविष्य में सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने से प्रतिबंधित भी किया जा सकता है।
कानून के सबसे कठोर प्रावधान: एजेंसी से लेकर अधिकारी तक होंगे जिम्मेदार
शीर्ष प्रबंधन पर होगी व्यक्तिगत कार्रवाई
अब किसी कंपनी में केवल छोटे कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराकर मामला खत्म नहीं होगा। यदि जांच में यह साबित होता है कि कंपनी के डायरेक्टर, वरिष्ठ अधिकारी, मैनेजर या जिम्मेदार पदाधिकारी पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी में शामिल थे, तो उनके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
मिलीभगत या सहमति साबित होने पर 5 से 10 वर्ष तक की जेल का प्रावधान।
जिम्मेदार अधिकारियों पर 5 करोड़ रुपए तक का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया जा सकता है।
कंपनी के पद पर होना किसी अधिकारी को कानूनी कार्रवाई से बचाव नहीं देगा।
परीक्षा केंद्र और तकनीकी व्यवस्था में मनमानी पर रोक
परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी बिना परीक्षा प्राधिकरण की लिखित अनुमति के परीक्षा केंद्र में बदलाव नहीं कर सकेगी।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत एजेंसियों को कई अनिवार्य कदम उठाने होंगे—
परीक्षा केंद्रों का पूर्व सुरक्षा ऑडिट।
अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक जांच।
प्रश्नपत्रों की सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था।
कंप्यूटर सिस्टम और नेटवर्क की मजबूत सुरक्षा।
परीक्षा सामग्री की गोपनीयता सुनिश्चित करना।
इन व्यवस्थाओं में गंभीर चूक को आपराधिक लापरवाही माना जा सकता है।
सरकारी अधिकारी भी नहीं बचेंगे, पेपर लीक में मिलीभगत पर होगी कठोर कार्रवाई
परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सरकारी अधिकारी या कर्मचारी यदि पेपर लीक, भ्रष्टाचार या किसी संगठित गिरोह की मदद करते पाए जाते हैं तो उनके लिए भी कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।
दोषी अधिकारियों को 10 साल तक जेल और भारी जुर्माना
यदि कोई लोक सेवक या परीक्षा अधिकारी सीधे तौर पर पेपर लीक या परीक्षा में हेरफेर में शामिल पाया जाता है तो-
5 से 10 वर्ष तक कठोर कारावास।
50 लाख रुपए तक का व्यक्तिगत जुर्माना।
गंभीर मामलों में अन्य कानूनी कार्रवाई।
नौकरी जाएगी, भविष्य की सरकारी सेवाओं पर भी संकट
संगठित अपराध पर 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना
2 महीने में जांच और तीन महीने में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का प्रस्ताव
दोष सिद्ध होने या गंभीर जांच में संलिप्तता पाए जाने पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।
संभावित कार्रवाई में शामिल है
सरकारी सेवा से बर्खास्तगी।
भविष्य में सरकारी पदों पर नियुक्ति पर रोक।
पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर कार्रवाई।
अवैध कमाई की संपत्ति होगी जब्त
यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी अधिकारी या व्यक्ति ने पेपर लीक या परीक्षा धांधली के जरिए रिश्वत या आर्थिक लाभ प्राप्त किया है, तो उसकी चल-अचल संपत्ति कुर्क की जा सकती है।
इस प्रावधान का उद्देश्य परीक्षा माफिया की आर्थिक ताकत को खत्म करना है, ताकि अवैध कमाई से खड़े किए गए नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
मौन सहमति भी मानी जाएगी अपराध
कानून में वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। यदि किसी परीक्षा केंद्र के प्रभारी या वरिष्ठ अधिकारी को गड़बड़ी की जानकारी थी और उन्होंने उसे रोकने के लिए कदम नहीं उठाए या मामले को दबाने की कोशिश की, तो उन्हें भी अपराध में सहभागी माना जा सकता है।
ईमानदार परीक्षार्थियों के हितों की सुरक्षा
कानून का लक्ष्य सामान्य परीक्षार्थियों को परेशान करना नहीं, बल्कि संगठित रूप से परीक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों पर कार्रवाई करना है। परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए पेपर लीक, फर्जीवाड़े और भ्रष्ट नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई को जरूरी माना जा रहा है।
जानकारों के अनुसार इन प्रावधानों के प्रभावी लागू होने से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।
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