जमशेदपुर के पटमदा प्रखंड अंतर्गत ओड़िया पंचायत में चल रहे पत्थर खनन के विरोध में सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और खनन कार्य को तत्काल बंद कराने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन ने किया।

ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ जुलूस की शक्ल में उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि उनके क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे पत्थर खनन के कारण गांव का वातावरण प्रभावित हो रहा है और आम लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं दुखनी सोरेन ने आरोप लगाया कि पत्थर खनन के कारण गांव के लोग विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि खनन से निकलने वाली धूल और प्रदूषण का सीधा असर ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसके अलावा गांव के तालाबों का पानी भी प्रदूषित हो रहा है, जिससे पेयजल और दैनिक उपयोग में परेशानी हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि खनन के दौरान किए जाने वाले विस्फोटों से गांव के कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं और लोगों के घर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार हो रहे विस्फोटों से उनके जान-माल की सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि क्षेत्र में चल रहे पत्थर खनन को अविलंब बंद कराया जाए और प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित एवं प्रदूषण मुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए। साथ ही खनन से हुए नुकसान की जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की भी मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।
झारखंड में अवैध पत्थर खनन एक गंभीर पर्यावरणीय, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। इससे राज्य सरकार को सालाना लगभग 2,000 करोड़ रुपए से अधिक के राजस्व का नुकसान हो रहा है। साहिबगंज, हजारीबाग, गिरिडीह, और जमशेदपुर जैसे जिले इस अवैध कारोबार के मुख्य केंद्र हैं। इन जगहों पर सिंडिकेट और माफियाओं द्वारा नियमों को ताक पर रखकर पहाड़ों को नष्ट किया जा रहा है।
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