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श्रावण के पहले सोमवार पर रांची का ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर तैयार, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर निगम ने किए व्यापक इंतजाम

On: August 2, 2026 1:45 PM
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श्रावण के पहले सोमवार पर रांची का ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर तैयार, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर निगम ने किए व्यापक इंतजाम
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श्रावण मास का पहला सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। इस दिन देशभर के शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। झारखंड की राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर भी सावन के दौरान आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है, जहां हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। इस बार भी पहले सोमवार को लेकर रांची नगर निगम ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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सावन के महीने में बड़ी संख्या में शिवभक्त स्वर्णरेखा नदी से पवित्र जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए पहाड़ी मंदिर पहुंचते हैं। “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस धार्मिक परंपरा को देखते हुए नगर निगम ने स्वर्णरेखा घाट से लेकर पहाड़ी मंदिर तक पूरे मार्ग पर विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं।

रांची की महापौर रोशनी खालको ने बताया कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए स्वर्णरेखा घाट की विशेष सफाई कराई गई है। पूरे मार्ग पर आकर्षक प्रकाश व्यवस्था की जा रही है, जिससे रात के समय भी श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन मिल सके। इसके साथ ही मुख्य मार्ग को सजाया जा रहा है, ताकि सावन की धार्मिक आस्था और उत्सव का माहौल और भी भव्य दिखाई दे।

पहाड़ी मंदिर परिसर में साफ-सफाई के साथ शौचालय, डस्टबिन, पर्याप्त रोशनी, पेवर ब्लॉक, बैठने के लिए बेंच तथा अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। नगर निगम की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं, ताकि भीड़ के दौरान व्यवस्था सुचारु बनी रहे और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

पहाड़ी मंदिर रांची के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां दूर-दराज के जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रशासन और नगर निगम को उम्मीद है कि इस बार भी पहले सोमवार को हजारों शिवभक्त जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंचेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए सफाई, प्रकाश व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए तैयारियां अंतिम रूप दे दी गई हैं, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण और व्यवस्थित वातावरण में भगवान भोलेनाथ के दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर सकें।

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