लोहरदगा के लूथरन स्कूल मैदान में शहरवासियों को स्वास्थ्य और व्यायाम की सुविधा देने के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से स्थापित ओपन जिम इन दिनों बदहाली का शिकार है। नियमित देखरेख के अभाव में जहां कई व्यायाम उपकरण गायब हो गए हैं, वहीं बचे हुए उपकरणों में जंग लगने लगी है। परिसर में घास, मिट्टी, पानी और कचरा जमा होने से सुविधा की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर बना ओपन जिम अब खुद रखरखाव का मोहताज
लूथरन स्कूल मैदान में लगाया गया ओपन जिम कभी शहरवासियों के लिए निशुल्क व्यायाम का उपयोगी स्थान था। सुबह और शाम लोग यहां पहुंचकर व्यायाम और सैर करते थे, जबकि मैदान में बच्चों के खेलने की सुविधा भी उपलब्ध थी। लेकिन वर्तमान स्थिति में कई उपकरणों के आसपास घास उग आई है और कुछ उपकरण जंग की चपेट में हैं। कई उपकरणों के गायब होने की बात भी सामने आई है।
मैदान के परिसर में जगह-जगह मिट्टी और पानी जमा होने के साथ कचरा भी दिखाई देता है। नियमित सफाई, निरीक्षण और मरम्मत के अभाव में लाखों रुपये से तैयार की गई यह सार्वजनिक सुविधा धीरे-धीरे अपनी उपयोगिता खोती नजर आ रही है।
गेट बंद रहने से भी लोगों को परेशानी
नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव के अनुसार, लूथरन ग्राउंड का गेट बंद रहने के कारण लोगों को परिसर में प्रवेश करने में परेशानी होती है। उनका कहना है कि ओपन जिम के साथ बच्चों के खेलने के लिए भी व्यवस्था तैयार की गई थी, लेकिन वर्तमान में मैदान और जिम की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सार्वजनिक राशि से तैयार की गई इस सुविधा के निर्माण के बाद उसके नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी को लेकर कितनी गंभीरता बरती गई।
जमीन के स्वामित्व को लेकर भी जांच की बात
ओपन जिम की बदहाली के बीच लूथरन ग्राउंड की जमीन के स्वामित्व का मामला भी चर्चा में आ गया है। नगर परिषद अध्यक्ष अनिल उरांव ने कहा है कि सरकारी राशि से किसी जमीन पर निर्माण या सुविधा विकसित करने से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि जमीन सरकारी है अथवा किसी संस्था या निजी व्यक्ति की।
उनके अनुसार, सबसे पहले लूथरन ग्राउंड की जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी। जमीन सरकारी पाए जाने पर नगर परिषद की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी, जबकि किसी संस्था या निजी व्यक्ति के स्वामित्व में होने पर स्थिति अलग होगी।
2013 से 2018 के बीच खरीदी गई जमीनों पर भी सवाल
नगर परिषद अध्यक्ष ने पूर्व नगर परिषद कार्यकाल के दौरान खरीदी गई अन्य जमीनों को लेकर भी जांच की बात कही है। उन्होंने वर्ष 2013 से 2018 के बीच दात्री, बीएस कॉलेज स्टेडियम के समीप, छत्तर बगीचा और शंख नदी के पास खरीदी गई जमीनों का उल्लेख किया।
अनिल उरांव का कहना है कि जमीन खरीदने के बाद नगर परिषद के नाम रसीद, म्यूटेशन और नामांतरण की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए थी। इसके साथ ही जमीन की बाउंड्री कराकर उसे नगर परिषद की संपत्ति के रूप में सुरक्षित किया जाना चाहिए था।
उनका आरोप है कि कुछ जमीनों के मामले में अब तक नगर परिषद के नाम रसीद और म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। उन्होंने इसी आधार पर जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेजों और पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की बात कही है।
पूर्व कार्यकाल में हुए कार्यों की भी जांच का दावा

अनिल उरांव ने पूर्व अध्यक्ष पवन एक्का के कार्यकाल में नगर परिषद के पैसे के कथित दुरुपयोग की जांच की बात कही है। उनका कहना है कि वर्ष 2013 से 2018 के बीच कराए गए विभिन्न कार्यों की जांच के दौरान यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा है कि केवल जमीन खरीद लेना पर्याप्त नहीं है। जमीन को नगर परिषद के नाम विधिवत दर्ज कराना, उसका म्यूटेशन कराना और उसे सुरक्षित रखना भी जरूरी है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर
नगर परिषद अध्यक्ष ने कहा है कि यदि जांच में जमीन खरीद या अन्य कार्यों में गड़बड़ी के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पूर्व अध्यक्ष पवन एक्का को लेकर भी कड़ा बयान दिया है और कहा है कि जांच में उनके खिलाफ मामला साबित होने पर जेल की स्थिति बन सकती है। यह फिलहाल उनका आरोप और बयान है; अंतिम स्थिति जांच के निष्कर्ष और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
वहीं, ओपन जिम की बदहाल स्थिति ने सार्वजनिक सुविधाओं के रखरखाव पर एक अलग सवाल खड़ा कर दिया है। लाखों रुपये खर्च कर सुविधा तैयार करने के बाद यदि उसकी नियमित सफाई, मरम्मत और सुरक्षा की व्यवस्था नहीं हो तो ऐसी योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित होता है।
अब लूथरन ग्राउंड की जमीन के स्वामित्व, पूर्व में खरीदी गई जमीनों के दस्तावेज, म्यूटेशन और नगर परिषद के पुराने कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल शहरवासियों की नजर इस बात पर है कि बदहाल ओपन जिम की मरम्मत और नियमित रखरखाव के लिए नगर परिषद की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।







