धनबाद के बाघमारा इलाके में भू-धंसान का खतरा लगातार लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। हादसों की आशंका को देखते हुए बीसीसीएल प्रबंधन ने प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थायी रूप से पुनर्वासित करने की कवायद तेज कर दी है। पाण्डेडीह, नया मोड़, अंगारपथरा समेत कई क्षेत्रों में नोटिस चिपकाए जा रहे हैं, चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं और माइकिंग के जरिए लोगों से खतरे वाले स्थानों को खाली करने की अपील की जा रही है।
बीसीसीएल प्रबंधन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाना उसकी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से जरेडा के सहयोग से लोगों को बेलगढ़िया टाउनशिप में पुनर्वासित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। प्रबंधन की ओर से लगातार लोगों को समझाने और उन्हें असुरक्षित क्षेत्रों से हटाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि भू-धंसान की किसी संभावित घटना में जान-माल का नुकसान न हो।
हालांकि, प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच पुनर्वास को लेकर अब भी नाराजगी और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेलगढ़िया में रोजगार के पर्याप्त साधन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि वे अपना मौजूदा घर और इलाका छोड़कर वहां जाते हैं तो उनके रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों का क्या होगा। इन्हीं चिंताओं के कारण कई परिवार अब भी प्रभावित क्षेत्रों में रहने को मजबूर हैं।
बीसीसीएल एरिया-5 के महाप्रबंधक निर्झर चक्रवर्ती ने कहा कि सैकड़ों चिन्हित स्थलों पर रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वासित करना प्रबंधन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस कार्य में जरेडा की ओर से भी सहयोग मिल रहा है। उनके मुताबिक कई इलाकों में अवैध खनन हुआ है, जिसकी पूरी जानकारी प्रबंधन के पास नहीं है। जिन घरों के नीचे इस तरह का खनन हुआ है, वहां रहने वाले लोग भी असुरक्षित परिस्थितियों से परिचित हैं और भू-धंसान के रूप में इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं।
महाप्रबंधक ने लोगों से अपील की कि वे खतरे वाले क्षेत्रों को जल्द से जल्द खाली करें और किसी भी तरह की भ्रांति का शिकार न हों। उन्होंने कहा कि बेलगढ़िया में लोगों को जरूरी संसाधनों और सुविधाओं के साथ बसाने की योजना है। साथ ही उन्होंने पुनर्वास को लेकर प्रबंधन की योजनाओं के बारे में गलत जानकारी या भ्रम फैलाने से बचने और सुरक्षित पुनर्वास की प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील की।
भू-धंसान का दंश झेल रहे बाघमारा के लोगों के लिए सुरक्षा के साथ-साथ रोजगार, आवास और मूलभूत सुविधाएं भी बड़ी चिंता हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों को भरोसे में लेकर उनकी शंकाओं और समस्याओं का समाधान करना बेहद जरूरी है। बीसीसीएल और प्रभावित लोगों के बीच संवाद जितना बेहतर होगा, पुनर्वास की प्रक्रिया उतनी ही सुचारू तरीके से आगे बढ़ सकेगी। अब देखना होगा कि प्रबंधन लोगों की चिंताओं को किस तरह दूर करता है और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित एवं संतोषजनक पुनर्वास कब तक मिल पाता है।





