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रांची में भर्ती परीक्षा विवाद पर छात्रों का उग्र प्रदर्शन, हजारों युवाओं ने मशाल जुलूस निकाल CBI जांच की मांग दोहराई

On: August 2, 2026 8:42 PM
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रांची में भर्ती परीक्षा विवाद पर छात्रों का उग्र प्रदर्शन, हजारों युवाओं ने मशाल जुलूस निकाल CBI जांच की मांग दोहराई
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झारखंड की राजधानी रांची एक बार फिर छात्रों के आक्रोश की गवाह बनी। राज्य की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलनरत छात्रों ने रविवार को विशाल मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ यह जुलूस अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

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जेपीएससी, जेएसएससी और सीजीएल भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में छात्र पिछले नौ दिनों से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन पर डटे हुए हैं। आंदोलन में शामिल छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

मशाल जुलूस में झारखंड के सभी 24 जिलों से आए हजारों छात्र शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मशाल लेकर शांतिपूर्ण मार्च किया और सरकार से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की। छात्रों का आरोप है कि हाल के वर्षों में हुई विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे हैं, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

प्रदर्शनकारी छात्रों की सबसे प्रमुख मांग यह है कि कथित भर्ती घोटालों की जांच राज्य की सीआईडी के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और दोषियों को स्थायी रूप से सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जाए।

छात्रों ने यह भी मांग की कि राज्य सरकार भविष्य की सभी भर्ती परीक्षाओं के लिए ऐसी मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था लागू करे, जिससे परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रहे और अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल हो सके। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो योग्य युवाओं का भविष्य लगातार अनिश्चितता में बना रहेगा।

आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने लिए न्याय मांगना नहीं, बल्कि झारखंड की भर्ती व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाना है। फिलहाल छात्रों का सत्याग्रह और विरोध प्रदर्शन जारी है तथा अब सभी की नजर राज्य सरकार की अगली प्रतिक्रिया और संभावित निर्णय पर टिकी हुई है।

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