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विश्व आदिवासी दिवस: रांची में कल से सजेगा आदिवासी संस्कृति का रंग, मोरहाबादी में जुटेंगे 5 हजार से अधिक कलाकार

On: August 8, 2026 3:49 PM
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विश्व आदिवासी दिवस: रांची में कल से सजेगा आदिवासी संस्कृति का रंग, मोरहाबादी में जुटेंगे 5 हजार से अधिक कलाकार
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रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में 9 और 10 अगस्त को झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, कला, परंपरा और विरासत का भव्य प्रदर्शन देखने को मिलेगा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर दो दिवसीय झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और आयोजन स्थल को पारंपरिक कला और संस्कृति के रंगों से सजाया जा रहा है।

महोत्सव में देशभर से 5 हजार से अधिक कलाकार हिस्सा लेंगे। नृत्य, संगीत, पेंटिंग और विभिन्न लोक कलाओं के माध्यम से कलाकार आदिवासी जीवन, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की झलक पेश करेंगे। आयोजन का उद्देश्य झारखंड की जनजातीय पहचान को व्यापक मंच देना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।

महोत्सव में पारंपरिक जनजातीय खान-पान भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगा। 30 से अधिक आदिवासी समुदायों के पारंपरिक व्यंजनों और खान-पान की विविधता लोगों को देखने और अनुभव करने का मौका मिलेगा। इसके अलावा कला-शिल्प प्रदर्शनी और आदिवासी पुस्तक मेला भी आयोजित किया जाएगा।

इस बार महोत्सव में संस्कृति के साथ आधुनिक तकनीक का भी मेल देखने को मिलेगा। आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में 5डी इमर्सिव जोन, ड्रोन शो, वृत्तचित्र एवं फिल्म महोत्सव और परिधान फैशन शो शामिल हैं। झारखंड के क्रांतिकारियों और महापुरुषों के जीवन पर आधारित फिल्मों के प्रदर्शन के लिए विशेष थिएटर की भी व्यवस्था की गई है।

मोरहाबादी मैदान के अलावा रांची के विभिन्न हिस्सों को भी पारंपरिक कला और सोहराय पेंटिंग से सजाया जा रहा है। इससे शहर में महोत्सव के दौरान आदिवासी संस्कृति और लोककला की जीवंत झलक देखने को मिलेगी।

विश्व आदिवासी दिवस हर वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया के आदिवासी और स्वदेशी समुदायों के अधिकारों की रक्षा, उनकी संस्कृति, भाषा और परंपराओं के संरक्षण तथा उनके सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान को सम्मान देना है।

दो दिनों तक चलने वाला यह आयोजन रांची को आदिवासी कला, संस्कृति, परंपरा और गौरवशाली विरासत के रंग में रंग देगा। महोत्सव के जरिए झारखंड की जनजातीय पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों और पारंपरिक कला को भी एक बड़ा मंच मिलने की उम्मीद है।

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