गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ दिल्ली से देवघर पहुंचे। देवघर एयरपोर्ट पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के मुद्दे पर दोनों नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोला और छात्रों की मांगों का समर्थन किया।
गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि रांची में JPSC और JSSC को लेकर धरने पर बैठे छात्रों के साथ वे 13 तारीख के बाद खुद आंदोलन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल संसद का सत्र 13 तारीख तक चल रहा है, इसलिए संसद सत्र समाप्त होने के बाद वह छात्रों के साथ धरने पर बैठेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि संसद सत्र के दौरान भी इस मुद्दे को संसद परिसर में जोरदार तरीके से उठाया जा रहा है।
निशिकांत दुबे ने कहा कि यदि 13 तारीख तक इस मामले में कोई ठोस फैसला नहीं होता है तो वह खुद छात्रों के आंदोलन में शामिल होंगे। उन्होंने JPSC और JSSC से जुड़े मामलों की CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि जांच स्पष्ट और निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई हो, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
वहीं, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने JPSC और JSSC से जुड़े विवाद को गंभीर बताते हुए इसकी तुलना चारा और लैंड फॉर जॉब जैसे चर्चित मामलों से की। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की मांग बहुत बड़ी नहीं है। छात्रों की मुख्य मांग JPSC और JSSC से जुड़े मामलों की CBI जांच कराने और विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की है।
संजय सेठ ने कहा कि आंदोलन को करीब आधा महीना बीत चुका है, लेकिन सरकार की ओर से अब तक छात्रों की मांगों को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मामले की जांच CID को दी जाती है तो यह लंबे समय तक लंबित रह सकती है। उन्होंने झारखंड में पूर्व में सामने आए शराब, कोयला, जमीन और बालू से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए कहा कि कई मामले ठंडे बस्ते में चले गए हैं और उन्हें आशंका है कि JPSC-JSSC का मामला भी उसी तरह लंबित हो सकता है।
उन्होंने JPSC और JSSC मामलों की CBI जांच की मांग दोहराते हुए आंदोलन कर रहे छात्रों के तरीके की भी सराहना की। संजय सेठ ने कहा कि छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और किसी तरह के देश विरोधी नारे नहीं लगाए जा रहे हैं। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि वह उनके संघर्ष को सलाम करते हैं।
दोनों नेताओं के बयानों के बाद JPSC और JSSC से जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने के संकेत हैं। अब निगाहें 13 तारीख के बाद होने वाले घटनाक्रम और सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।
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