झारखंड हाईकोर्ट में JPSC और JSSC से जुड़े विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से काउंटर एफिडेविट दाखिल किया गया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है। इससे पहले अदालत ने सरकार को 48 घंटे के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
मामले में 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने इससे पहले नियुक्तियां रद्द करने के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाई थी, जिसके बाद प्रभावित अभ्यर्थियों को फिलहाल अपने पदों पर बने रहने की अनुमति मिली। लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जांच में यदि किसी अभ्यर्थी की नियुक्ति गलत तरीके से हुई पाई जाती है, तो जांच पूरी होने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें सेवा से बर्खास्तगी भी शामिल है। फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति रद्द करने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना पर भी हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी।
इस मामले की जांच भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीआईडी की विशेष जांच टीम यानी SIT कर रही है। हाल की जांच में सीआईडी की कार्रवाई भी तेज हुई है और JPSC-JSSC परीक्षाओं से जुड़े मामलों में कई गिरफ्तारियां की गई हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से जांच की निगरानी को लेकर भी टिप्पणी की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जांच की निगरानी के लिए झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता में व्यवस्था की गई है। एसआईटी द्वारा पूछताछ के दौरान किसी अभ्यर्थी को उत्पीड़न की शिकायत हो तो वह संबंधित कमेटी के समक्ष अपनी बात रख सकता है।
मामले में रमेश उरांव समेत अन्य याचिकाकर्ताओं ने नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। अभ्यर्थियों की ओर से दलील दी गई है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त कई उम्मीदवारों की सेवाएं इस फैसले से प्रभावित हुई हैं। वहीं, इंटरवेनर के तौर पर अधिवक्ता कुमार हर्ष ने अनसिलेक्टेड मेरिटोरियस अभ्यर्थियों का पक्ष भी अदालत के सामने रखने की बात कही है। उनका कहना है कि ऐसे अभ्यर्थियों को भी मामले की सुनवाई में अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल होने के बाद अब याचिकाकर्ताओं और अन्य पक्षों को सरकार के काउंटर एफिडेविट पर अपनी प्रतिक्रिया देने का अवसर मिलेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी। भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और नियुक्तियों के भविष्य को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की नजर अब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है।







