लोहरदगा जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कुडू में शनिवार की रात बिजली गुल होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली जाने के बाद अस्पताल के वार्डों में अंधेरा छा गया और पंखे बंद हो गए। गर्मी और मच्छरों के बीच मरीजों को टॉर्च की रोशनी के सहारे रात गुजारनी पड़ी। परिजनों ने मच्छरों से बचने के लिए अगरबत्ती का सहारा लिया।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब बिजली बहाल नहीं होने पर अस्पताल के जनरेटर को चलाने का प्रयास किया गया। बताया गया कि पुराने जनरेटर में डीजल उपलब्ध नहीं था। इसके बाद आनन-फानन में करीब 20 लीटर डीजल मंगाया गया, लेकिन देर रात तक जनरेटर चालू नहीं हो सका। इससे अस्पताल की वैकल्पिक बिजली व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
एक महीने में दूसरी बार सामने आया बिजली संकट
सीएचसी कुडू में बिजली व्यवस्था को लेकर यह मामला पहली बार सामने नहीं आया है। करीब एक महीने पहले दुर्घटना में घायल एक मरीज का बिजली नहीं रहने के कारण टॉर्च की रोशनी में इलाज किए जाने की बात सामने आई थी। उस समय भाजपा नेता सरजू कुमार साहू ने मामले को उठाया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल में नया जनरेटर लगाए जाने की बात सामने आई थी।
इसके बावजूद शनिवार की रात बिजली गुल होने के बाद मरीजों को राहत नहीं मिल सकी। इससे जनरेटर के संचालन, ईंधन की उपलब्धता और अस्पताल की आपातकालीन बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
भाजपा नेताओं ने किया औचक निरीक्षण

शनिवार की रात भाजपा नेता सरजू कुमार साहू, मंडल अध्यक्ष कृष्णा मोदी, जिला मंत्री संजय चौधरी और सूरज प्रसाद साहू ने सीएचसी कुडू का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में बिजली व्यवस्था बाधित मिली। मरीजों और उनके परिजनों ने बिजली नहीं रहने से हो रही परेशानियों की जानकारी भाजपा नेताओं को दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरजू कुमार साहू ने लोहरदगा उपायुक्त, सिविल सर्जन और चिकित्सा प्रभारी से फोन पर बातचीत कर अस्पताल की स्थिति से अवगत कराया तथा जल्द समस्या का समाधान कराने की मांग की।
अस्पताल की मूलभूत सुविधाओं पर उठे सवाल

मंडल अध्यक्ष कृष्णा मोदी ने कहा कि सीएचसी कुडू की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी के मद्देनजर औचक निरीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की बात कही।
भाजपा जिला मंत्री संजय चौधरी ने भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए बिजली, जनरेटर और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की।
गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए बढ़ सकती है परेशानी
अस्पताल में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा बाधित होने का असर भर्ती मरीजों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, गंभीर मरीजों और छोटे बच्चों पर भी पड़ सकता है। रात के समय बिजली गुल होने की स्थिति में अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं के संचालन को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
शनिवार की घटना ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि अस्पताल में आपात स्थिति के लिए जनरेटर और पर्याप्त ईंधन की व्यवस्था किस तरह सुनिश्चित की जाती है। नया जनरेटर लगाए जाने के बावजूद बिजली जाने पर वैकल्पिक व्यवस्था प्रभावी क्यों नहीं हो सकी, यह भी जांच का विषय है।
स्थायी समाधान की जरूरत
सीएचसी कुडू में सामने आई घटना के बाद अब सवाल केवल बिजली गुल होने तक सीमित नहीं है। जनरेटर की उपलब्धता, उसके नियमित संचालन, ईंधन की पर्याप्त व्यवस्था और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
एक महीने के भीतर बिजली व्यवस्था से जुड़ी दूसरी घटना सामने आने के बाद अब मरीजों और उनके परिजनों की नजर स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की कार्रवाई पर है। जरूरत इस बात की है कि समस्या का केवल तत्काल समाधान न किया जाए, बल्कि अस्पताल की वैकल्पिक बिजली व्यवस्था को नियमित और भरोसेमंद बनाने के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।








