Home झारखंड बिहार राजनीति मनोरंजन क्राइम हेल्थ राशिफल
---Advertisement---

MMDR Amendment Bill पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान, बोले- खनिज उत्पादन बढ़ेगा तो रोजगार और राज्य का राजस्व बढ़ेगा

MMDR Amendment Bill पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान, बोले- खनिज उत्पादन बढ़ेगा तो रोजगार और राज्य का राजस्व बढ़ेगा
---Advertisement---

झारखंड में खनिज संपदा, राजस्व और खनन नीति को लेकर चल रही बहस के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने केंद्र सरकार के MMDR संशोधन बिल के समर्थन में अपनी बात रखी है। एक दिवसीय दौरे पर बोकारो पहुंचे बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह संशोधन केवल झारखंड के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में खनिज उत्पादन, उद्योग, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न राज्य है। यहां कोयला, लौह अयस्क और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। ऐसे में खनिज उत्पादन को बढ़ावा देना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि खनिजों की लागत लगातार बढ़ती है तो उसका असर उत्पादन के साथ-साथ उद्योगों और रोजगार पर भी पड़ता है।

क्या है MMDR और क्यों है इसकी चर्चा?

MMDR यानी Mines and Minerals (Development and Regulation) Act देश में खनिज संसाधनों के विकास और खनन गतिविधियों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून है। इसके तहत खनिजों की खोज, खनन, लीज, रॉयल्टी और नियमन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान आते हैं।

MMDR में समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं ताकि खनिज क्षेत्र में निवेश बढ़ाया जा सके, उत्पादन को प्रोत्साहन मिले और खनिज संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो।

2026 में प्रस्तावित संशोधन को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बहस खनिज अधिकारों, खनिज-युक्त भूमि पर लगने वाली लेवी और अलग-अलग राज्यों में खनिज क्षेत्र पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से जुड़ी है।

बाबूलाल मरांडी ने टैक्स को लेकर उठाया सवाल

बोकारो में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मेजर मिनरल्स पर अलग-अलग प्रकार के टैक्स और अतिरिक्त आर्थिक भार लगाए जाने से खनिज उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि जब खनिज निकालने की लागत बढ़ती है तो उसका असर आगे बाजार कीमतों पर पड़ता है।

उनके मुताबिक कोयला और आयरन जैसे खनिजों की कीमत बढ़ने का असर केवल खनन कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव बिजली, स्टील, सीमेंट और खनिज आधारित दूसरे उद्योगों पर भी पड़ सकता है।

यदि स्थानीय स्तर पर खनिज उत्पादन महंगा हो जाता है या उत्पादन में कमी आती है तो उद्योगों को दूसरे राज्यों से कच्चा माल खरीदना पड़ सकता है। बाबूलाल मरांडी के अनुसार ऐसी स्थिति में झारखंड को दोहरा नुकसान हो सकता है—एक तरफ स्थानीय उत्पादन और रोजगार प्रभावित होंगे, वहीं दूसरी तरफ राज्य के राजस्व पर भी असर पड़ेगा।

झारखंड और ओडिशा के राजस्व का मुद्दा

बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की तुलना ओडिशा से करते हुए खनिज राजस्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद झारखंड को खनिज क्षेत्र से अपेक्षित राजस्व क्यों नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा को खनिजों से टैक्स और अन्य मदों में बड़ी राशि प्राप्त हो रही है, जबकि झारखंड में उत्पादन घटने की स्थिति चिंता का विषय है।

उनके मुताबिक अगर खनिज उत्पादन लगातार कम होता है तो इसका असर सिर्फ सरकारी खजाने पर नहीं पड़ेगा, बल्कि खनन से जुड़े परिवहन, व्यापार, छोटे उद्योग और स्थानीय रोजगार पर भी दिखाई देगा।

खनिज उत्पादन कम होने का क्या असर पड़ सकता है?

झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। कोयला और लौह अयस्क जैसे खनिजों से सीधे तौर पर कई उद्योग जुड़े हुए हैं।

एक खदान में केवल खनन कार्य ही नहीं होता। इसके साथ परिवहन, मशीनरी, मरम्मत, निर्माण, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, होटल, छोटे कारोबार और अन्य सेवाओं की पूरी श्रृंखला जुड़ी होती है।

इसलिए यदि खनन गतिविधियां बढ़ती हैं तो उससे जुड़े कई क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं उत्पादन में कमी आने पर इसका प्रभाव पूरी सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

यही वजह है कि MMDR संशोधन को लेकर झारखंड में चर्चा केवल खनन कंपनियों या सरकारी राजस्व तक सीमित नहीं है। इसका संबंध रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जोड़ा जा रहा है।

केंद्र के समान कानून की बात

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य पूरे देश के लिए एक समान व्यवस्था तैयार करना है, ताकि राज्यों में खनिज क्षेत्र से जुड़े नियमों और आर्थिक बोझ में अत्यधिक अंतर न रहे।

उनका कहना है कि एक समान और स्पष्ट व्यवस्था से कंपनियों के लिए निवेश का माहौल बेहतर हो सकता है। यदि निवेश बढ़ता है तो नई खनन परियोजनाएं शुरू होने, उत्पादन बढ़ने और रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना बन सकती है।

उनके अनुसार खनिज संसाधनों का उपयोग केवल जमीन के नीचे पड़े संसाधन निकालने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ उद्योग, रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी जोड़कर देखना जरूरी है।

झारखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है MMDR संशोधन?

झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। इसलिए खनिज क्षेत्र से जुड़े किसी भी बड़े कानूनी बदलाव का सीधा संबंध राज्य की अर्थव्यवस्था से हो सकता है।

एक तरफ राज्य के लिए खनिजों से मिलने वाला राजस्व महत्वपूर्ण है। दूसरी तरफ खनन और उद्योग की लागत भी एक बड़ा मुद्दा है। यदि लागत बहुत बढ़ती है तो उत्पादन और निवेश प्रभावित होने की आशंका रहती है।

यही संतुलन MMDR संशोधन को लेकर होने वाली बहस के केंद्र में है।

रोजगार पर भी पड़ेगा असर

बाबूलाल मरांडी ने खनिज उत्पादन को रोजगार से जोड़ते हुए कहा कि खनन क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

कोयला और लौह अयस्क की खदानों के आसपास हजारों लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक गतिविधियों से जुड़े होते हैं। खनन से जुड़े परिवहन और दूसरे व्यवसायों में भी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है।

उनका कहना है कि अगर उत्पादन बढ़ता है तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है और इसका फायदा छोटे कारोबारियों से लेकर बड़े उद्योगों तक पहुंच सकता है।

राज्य के राजस्व और उत्पादन के बीच संतुलन जरूरी

MMDR संशोधन की पूरी बहस को समझने के लिए दो महत्वपूर्ण पहलुओं को साथ देखना होगा। पहला है राज्य सरकारों का राजस्व और दूसरा है खनिज उत्पादन की लागत।

राज्यों के लिए खनिजों से मिलने वाली रॉयल्टी और अन्य राजस्व महत्वपूर्ण हैं। वहीं खनन कंपनियों और उद्योगों के लिए उत्पादन लागत भी महत्वपूर्ण है।

यदि किसी क्षेत्र में अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता है तो कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। दूसरी ओर, राज्य सरकारों के लिए खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व विकास कार्यों और अन्य जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण होता है।

इसीलिए MMDR संशोधन को लेकर केंद्र और राज्यों की भूमिका, राजस्व और उत्पादन के बीच संतुलन जैसे मुद्दे आने वाले समय में भी चर्चा में रह सकते हैं।

बाबूलाल मरांडी ने बताया ‘प्राणवायु’

बाबूलाल मरांडी ने MMDR संशोधन को झारखंड के लिए भी महत्वपूर्ण बताते हुए इसे राज्य के खनिज क्षेत्र के लिए ‘प्राणवायु’ जैसा बताया।

उनका कहना है कि झारखंड की सबसे बड़ी ताकत उसके प्राकृतिक संसाधन हैं और इन संसाधनों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उत्पादन बढ़ेगा तो उद्योगों को कच्चा माल मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

हालांकि इस पूरे मुद्दे का वास्तविक असर आने वाले समय में खनिज उत्पादन, राज्य के राजस्व, उद्योगों की लागत और रोजगार के आंकड़ों से अधिक स्पष्ट होगा। फिलहाल बोकारो में बाबूलाल मरांडी के बयान ने MMDR संशोधन, खनिज उत्पादन और झारखंड के राजस्व को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

रांची में आयुर्वेद दिवस पर जुटे विशेषज्ञ, आयुष मेडिकल कॉलेज के लिए 900 करोड़ की परियोजना रिपोर्ट

रांची में आयुर्वेद दिवस पर जुटे विशेषज्ञ, आयुष मेडिकल कॉलेज के लिए 900 करोड़ की परियोजना रिपोर्ट

गुमला: घाघरा में घर की खिड़की तोड़कर लाखों की चोरी, नकदी और सोने-चांदी के जेवरात ले उड़े चोर

गुमला: घाघरा में घर की खिड़की तोड़कर लाखों की चोरी, नकदी और सोने-चांदी के जेवरात ले उड़े चोर

MMDR संशोधन पर रघुवर दास का हमला, बोले- झामुमो और कांग्रेस फैला रहे हैं भ्रम

MMDR संशोधन पर रघुवर दास का हमला, बोले- झामुमो और कांग्रेस फैला रहे हैं भ्रम

लोहरदगा: सीएचसी कुडू में बिजली संकट ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल, टॉर्च की रोशनी में मरीजों ने काटी रात

लोहरदगा: सीएचसी कुडू में बिजली संकट ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल, टॉर्च की रोशनी में मरीजों ने काटी रात

सरायकेला-खरसावां: राजनगर में मनसा पूजा पर सजा छऊ का रंगमंच, मानभूम शैली की प्रस्तुति ने मोहा ग्रामीणों का मन

सरायकेला-खरसावां: राजनगर में मनसा पूजा पर सजा छऊ का रंगमंच, मानभूम शैली की प्रस्तुति ने मोहा ग्रामीणों का मन

गोंदूडीह में झाड़ियों से मिला वासेपुर के युवक का शव, सिर पर चोट के निशान, मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस

गोंदूडीह में झाड़ियों से मिला वासेपुर के युवक का शव, सिर पर चोट के निशान, मौत की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस

Leave a Comment