बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा मंगलवार रात करीब 8:30 बजे हुआ जब रामपुर श्यामचंद गांव के ग्रामीण नदी पार कर दूसरे गांव में श्राद्ध के भोज में शामिल होने जा रहे थे। हादसे के बाद इलाके में मातम पसरा हुआ है और मृतक बच्चों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
भोज में शामिल होने जा रहे थे ग्रामीण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला में माता महारानी स्थान के पास सिंहेश्वर राय के घर भोज का आयोजन किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए करीब 15 से 20 लोग एक छोटी निजी नाव पर सवार होकर गंगा नदी पार कर रहे थे। इसी दौरान नाव पलट गई और उसमें सवार लोग नदी में डूबने लगे।

वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह के मुताबिक, इस हादसे में अब तक 13 शव बरामद किए गए हैं। उन्होंने बताया कि नाव पर सवार सभी बच्चे 15 वर्ष या उससे कम उम्र के थे। हादसे में जान गंवाने वालों में नौ लड़कियां भी शामिल थीं। सात लोगों को बचाया गया, जबकि घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। कुछ घायलों को बेहतर उपचार के लिए पटना रेफर किया गया।
राहत और बचाव कार्य में देरी के आरोप
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई में देरी होने का आरोप लगाया। घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे लोगों का कहना था कि राहत और बचाव कार्य शुरू करने में प्रशासन की ओर से देर हुई। हालांकि, घटना में कथित लापरवाही और प्रशासन की भूमिका को लेकर जांच किए जाने की बात कही गई है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस मामले में लापरवाही की आशंका जताते हुए जांच की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि हादसे में इस्तेमाल की गई नाव खराब थी और ग्रामीणों की ओर से अनुरोध किए जाने के बावजूद नई नाव उपलब्ध नहीं कराई गई थी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इन पहलुओं की जांच होना अभी बाकी है।
पीड़ित परिवारों से मिले चिराग पासवान
बुधवार को केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान वैशाली के राघोपुर पहुंचे और हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान कई परिजन भावुक हो गए और मंत्री के सामने अपना दर्द बयां किया। परिवारों का दुख देखकर माहौल गमगीन हो गया।
चिराग पासवान ने पीड़ित परिवारों को भरोसा दिलाया कि हादसे में जिम्मेदारी तय करने के लिए आवश्यक जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना जरूरी है कि नाव की उपलब्धता को लेकर ग्रामीणों ने कोई मांग की थी या नहीं और यदि मांग की गई थी, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
इससे पहले चिराग पासवान नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे, जहां हादसे में घायल बच्चों का इलाज चल रहा है। उन्होंने चिकित्सकों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और यह सुनिश्चित करने की बात कही कि बच्चों को बेहतर इलाज मिले तथा उनकी देखभाल में कोई कमी न रहे।
मुख्यमंत्री ने चार-चार लाख रुपये की सहायता की घोषणा की
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली नाव हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शोक संदेश जारी करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई। मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
उन्होंने प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। इस हादसे ने एक बार फिर नदी पार करने वाले ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित परिवहन और आपातकालीन व्यवस्था की जरूरत को सामने ला दिया है।
प्रधानमंत्री ने भी अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दुर्घटना में लोगों की मौत पर दुख जताते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। घोषित सहायता के अनुसार, प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को दो लाख रुपये और हादसे में घायल लोगों को 50 हजार रुपये दिए जाएंगे।
इस प्रकार, मृतकों के परिजनों के लिए राज्य सरकार की ओर से चार लाख रुपये और केंद्र की ओर से घोषित दो लाख रुपये की सहायता शामिल है। सहायता राशि के वितरण की प्रक्रिया संबंधित प्रशासनिक नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।
सुरक्षित नाव और समय पर मदद की जरूरत
वैशाली का यह हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला दुख छोड़ गया है। जिन बच्चों को परिवार के साथ एक भोज में शामिल होने जाना था, वे वापस घर नहीं लौट सके। घटना के बाद नाव की स्थिति, उपलब्ध वैकल्पिक परिवहन और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नदी पार करने के लिए नावों पर निर्भर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है। नाव की स्थिति की नियमित जांच, पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, जरूरत के समय वैकल्पिक नावों की उपलब्धता और दुर्घटना की सूचना मिलते ही त्वरित बचाव कार्रवाई से भविष्य में ऐसे हादसों का जोखिम कम किया जा सकता है।










