Drone Surveillance: झारखंड में अवैध और नकली शराब बनाने वालों की खैर नहीं। क्योंकि कारोबार पर लगाम लगाने के लिए उत्पाद विभाग आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। राज्य के घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अब ड्रोन के जरिए निगरानी की जाएगी।
सरकार के इस पहल का उद्देश्य अवैध शराब बनाने वाली इकाइयों का पता लगाना साथ ही तस्करी पर अंकुश लगाना और सरकारी राजस्व को होने वाले नुकसान को कम करना है। बुधवार को रामगढ़ के चुटूपालू में उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो की मौजूदगी में ड्रोन का ट्रायल किया गया। इस दौरान उत्पाद विभाग के कमिश्नर संदीप सिंह समेत कई अधिकारी और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
Drone Surveillance: जंगली इलाकों में भी होगी अवैध शराब के ठिकानों की पहचान
झारखंड की भौगोलिक स्थिति के कारण राज्य के कई हिस्सों में घने जंगल, पहाड़ और दुर्गम क्षेत्र मौजूद हैं। इन इलाकों में अवैध शराब का निर्माण और कारोबार करने वाले लोग अक्सर विभागीय निगरानी से बच निकलते हैं। कई बार इन अवैध ठिकानों तक पहुंचना भी अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से इन क्षेत्रों की आसमान से निगरानी की जा सकेगी।

उत्पाद विभाग की इस पहल से उन स्थानों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है, जहां अवैध तरीके से शराब बनाई जाती है या उसका भंडारण और कारोबार किया जाता है। विभाग की योजना राज्य के सभी जिलों में ड्रोन के इस्तेमाल की व्यवस्था विकसित करने की है, ताकि अवैध शराब के खिलाफ अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
कमांड सेंटर तक पहुंचेंगी ड्रोन से ली गई तस्वीरें और वीडियो
ड्रोन से निगरानी के दौरान जुटाई गई तस्वीरें और वीडियो कमांड सेंटर तक पहुंचाए जाएंगे। इन तस्वीरों और वीडियो के विश्लेषण के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों और उत्पाद विभाग की टीमों को मौके पर भेजकर छापेमारी तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
इस व्यवस्था से विभाग को उन इलाकों में भी निगरानी रखने में सुविधा होगी, जहां पारंपरिक तरीकों से पहुंचना मुश्किल है। ड्रोन के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों की निगरानी करने से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय पर मिलने और कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
Drone Surveillance: अवैध शराब के कारोबार पर लगेगा अंकुश
अवैध और नकली शराब का कारोबार न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि इससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान होता है। इसके अलावा, मिलावटी और नकली शराब लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उत्पाद विभाग को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से निगरानी तंत्र मजबूत होगा और अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना आसान होगा। इससे विभाग की टीमों को सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े क्षेत्रों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।
जल्द लागू हो सकती है नई व्यवस्था
उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो ने कहा कि ड्रोन के जरिए निगरानी की पहल झारखंड में अवैध और नकली शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस तकनीक की मदद से उन दुर्गम इलाकों पर भी नजर रखी जा सकेगी, जहां सामान्य तौर पर निगरानी करना कठिन होता है।
उत्पाद विभाग के कमिश्नर संदीप सिंह ने कहा कि विभाग इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल ड्रोन का ट्रायल किया गया है और जल्द ही इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
अगर ड्रोन योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में छिपकर चलाए जा रहे अवैध शराब के कारोबार की पहचान करने और समय रहते कार्रवाई करने में उत्पाद विभाग को काफी मदद मिल सकती है।
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