Women Prisoners Rights: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने जेलों में बंद महिला कैदियों और उनके साथ रह रहे बच्चों के मानवाधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक सख्त रुख अपनाया है। महिला कैदियों की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने नौ केंद्रीय मंत्रालयों के साथ-साथ सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, प्रशासकों और पुलिस महानिदेशकों (DGPs) को एक विस्तृत परामर्श (एडवाइजरी) जारी की है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से कहा है कि वे दो महीने के भीतर इन सिफारिशों को लागू करने के संबंध में एक प्रगति रिपोर्ट सौंपें।
आयोग का कहना है कि जेलों में केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना ही महिला कैदियों और उनके बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए काफी नहीं है। इसके अलावा, उनके साथ मानवीय व्यवहार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, माताओं और शिशुओं की देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं, कानूनी सहायता और परिवार के सदस्यों के साथ संपर्क बनाए रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
Women Prisoners Rights: महिला कैदियों की जरूरतों पर विशेष ध्यान
NHRC की एडवाइजरी में दस प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें गिरफ्तारी और जेल में प्रवेश की प्रक्रिया, कैदियों के रिकॉर्ड का रखरखाव, बच्चों का दस्तावेजीकरण, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएं और मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रमुख हैं।
आयोग ने जेलों में महिलाओं के रहन-सहन, साफ-सफाई और उनकी भलाई से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने की सिफारिश की है। इसके अलावा, आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि जेल कर्मचारियों को महिला कैदियों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाया जाए और उनके प्रति जेंडर-संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाए।
जेल में रहने वाले बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा
आयोग ने उन बच्चों के हितों के महत्व पर भी प्रकाश डाला है, जो या तो जेल में अपनी माताओं के साथ रहते हैं या उनसे अलग हो गए हैं। इस बात पर जोर दिया गया है कि ऐसे बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और उनके सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके अलावा, यह सिफारिश की गई है कि महिला कैदियों को अपने परिवारों से मिलने और उनके संपर्क में बने रहने के पर्याप्त अवसर दिए जाएं।
सलाहकार निर्देश में महिला कैदियों को अदालत में पेशी के दौरान जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने और न्याय तक उनकी पहुंच बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है।
रिहाई के बाद पुनर्वास पर भी जोर
NHRC ने इस बात पर जोर दिया है कि महिला कैदियों की रिहाई के बाद, उनके पुनर्वास और समाज में फिर से शामिल होने के लिए अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इस परामर्श में विदेशी महिला कैदियों की विशेष जरूरतों पर भी ध्यान दिया गया है।
आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन सिफारिशों को गंभीरता से लागू करें और दो महीने के भीतर ‘की गई कार्रवाई की रिपोर्ट’ (ATR) सौंपें। इस रिपोर्ट के माध्यम से, आयोग यह जानकारी मांगेगा कि महिला कैदियों और उनके बच्चों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संबंधित विभागों ने क्या कदम उठाए हैं।
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