Jharkhand Education News: झारखंड के करीब 1500 से अधिक वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। हेमंत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में अनुदान की बढ़ी हुई 75 प्रतिशत राशि उपलब्ध कराने के अपने आश्वासन को दोहराया है।
बुधवार को ‘वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह से मुलाकात की और सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दे उठाए। बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें अनुदान बढ़ाने, छात्राओं को सरकारी योजनाओं का लाभ देने और लंबित अनुदान राशि का जल्द भुगतान करने की मांग की गई।
Jharkhand Education News: 75% बढ़े अनुदान पर सरकार का भरोसा
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सचिव को बताया कि वित्त और कानून विभागों की सहमति के बावजूद, अनुदान बढ़ाने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष नहीं रखा गया है। यह मुद्दा विधानसभा में भी उठाया गया था, जहां सरकार ने आश्वासन दिया था कि बढ़ी हुई राशि 2026-27 के वित्तीय वर्ष में उपलब्ध करा दी जाएगी।

हालाँकि, सरकार ने एक शर्त रखी है कि इन संस्थानों की गुणवत्ता और उनके द्वारा तय मानकों का पालन किए जाने की जाँच की जानी चाहिए। ‘मोर्चा’ (संगठन) के अनुसार, स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों और झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) को 9 मार्च और 16 अगस्त 2026 तक मूल्यांकन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था।
इसके बावजूद, यह बात सामने आई है कि ज़्यादातर जिलों से रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। शिक्षा सचिव ने आश्वासन दिया कि जिन जिलों ने अभी तक रिपोर्ट नहीं सौंपी है, उनसे जल्द ही रिपोर्ट मंगवा ली जाएगी और अनुदान वितरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
छात्राओं को सावित्रीबाई फुले योजना का लाभ देने की मांग
संगठन ने यह मुद्दा भी उठाया कि सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं को ‘सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना’ का लाभ नहीं मिल रहा है। प्रतिनिधियों ने बताया कि विधायकों मथुरा महतो, अमित कुमार यादव और निर्मल महतो ने विधानसभा में यह मामला उठाया था।
शिक्षा सचिव ने बताया कि कुछ नीतिगत कारणों से यह मामला लंबित है, लेकिन इसे जल्द सुलझाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि सहायता प्राप्त संस्थानों में छात्राओं तक इस योजना का लाभ पहुँचाने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।
लंबित भुगतान पर अधिकारियों से मांगी रिपोर्ट
प्रतिनिधिमंडल ने उन अनुदानों का भुगतान न होने का मुद्दा भी उठाया, जिन्हें एक अपील प्रक्रिया के बाद मंजूरी दी गई थी। संगठन के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 को जिला शिक्षा अधिकारियों को धनराशि भेज दी गई थी, और उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे 15 अक्टूबर तक इसे संबंधित संस्थानों के खातों में स्थानांतरित कर दें। इसके बावजूद कई जिलों से इन निधियों का भुगतान न होने की शिकायतें मिली हैं।
शिक्षा सचिव ने इस मामले को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक से फोन पर बात की और अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिया कि अगले दिन सुबह 11:00 बजे तक निर्धारित प्रारूप में एक रिपोर्ट सौंपी जाए। इस रिपोर्ट में भुगतान की स्थिति का विवरण होना चाहिए। जिसमें यह बताया जाए कि किन जिलों में भुगतान पूरा हो चुका है और कहाँ भुगतान लंबित है साथ ही देरी के कारण भी बताए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मोर्चे के प्रतिनिधियों रघुनाथ सिंह, चंदेश्वर पाठक, अरविंद कुमार सिंह, नरोत्तम सिंह और मनीष कुमार ने इन तीन मुद्दों के तत्काल समाधान की मांग की है। शिक्षक और कर्मचारी अब सरकार के अगले कदमों का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि अनुदान बढ़ाने, छात्राओं तक योजना का लाभ पहुंचाने और लंबित भुगतानों का निपटारा करने के संबंध में कोई समाधान निकलेगा।
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