पत्रकारों और गौ-रक्षकों पर हमला किया गया बता दें की कपाली इलाके में मवेशी तस्करी और अवैध रूप से जानवरों को काटने की तैयारी को लेकर तनाव फैला हुआ है। इस बिच पत्रकार और गौ रक्षकों पर भी हमला हुआ है। जमशेदपुर में बकरीद से पहले ज़िला प्रशासन और शांति समिति अपनी बैठकों के दौरान लगातार अपील कर रहे हैं कि सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखा जाए और प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न दी जाए। इसी बीच मंगलवार को कपाली इलाके में तनाव फैल गया जब गौशाननगर इलाके में बड़े पैमाने पर मवेशी तस्करी और अवैध रूप से जानवरों को काटने की तैयारी की खबरें आईं।

कपाली इलाके में एक गौ-रक्षा संगठन को जानकारी मिली कि गौशाननगर में ‘पेची’ नाम के एक कथित मवेशी तस्कर के बूचड़खाने में बड़ी संख्या में गायों को रखा गया है और उनकी कुर्बानी की तैयारी चल रही है। संगठन के सदस्यों ने तुरंत कपाली पुलिस स्टेशन को इस बारे में सूचना दी। आरोप है कि पुलिस ने शुरुआती दौर में तत्काल कार्रवाई नहीं की जिसके बाद यह मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाया गया।
बताया जाता है कि इसके बाद पुलिस टीम हरकत में आई और गौ-रक्षकों के साथ मिलकर बताई गई जगह पर पहुंची। हालांकि आरोप है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही वहां मौजूद जानवरों को किसी दूसरी जगह ले जाया जा चुका था। इससे स्थानीय लोगों और गौ-रक्षकों के बीच इस बात को लेकर ज़ोरदार चर्चा शुरू हो गई कि आखिर कथित तस्करों को पुलिस की आने वाली छापेमारी के बारे में पहले से ही भनक कैसे लग गई।
जब पुलिस और गौ-रक्षक वहां मौजूद लोगों से पूछताछ कर रहे थे, तो मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान, वहां भारी भीड़ जमा हो गई और माहौल अचानक हिंसक हो उठा। आरोप है कि भीड़ ने गौ-रक्षकों के साथ-साथ घटना को कवर करने के लिए मौके पर पहुंचे पत्रकारों पर भी शारीरिक हमला किया। इस झड़प के दौरान एक गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाया गया। हालात इतने बिगड़ गए कि कई पत्रकारों और गौ-रक्षकों को अपनी जान बचाने के लिए मौके से भागना पड़ा। इस घटना के बाद, पूरे इलाके में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते सख्ती दिखाई होती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। साथ ही लोगों ने घटना के बाद पुलिस और प्रशासन के कामकाज के तरीके पर भी सवाल उठाते हुए कहा की प्रशासन इतनी गंभीर मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है ।
फिलहाल, सभी की नज़रें ज़िला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं, और सभी इस पूरी घटना पर उनकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहे हैं।अब यह देखना बाकी है कि इस मामले की जाँच किस दिशा में आगे बढ़ती है और अंतत दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
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