बेंगलुरु में एक बड़ी कंपनी के कैंपस में बने डे-केयर (Day-care center) सेंटर में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। आरोप है कि वहां देखभाल करने वालों ने बच्चों के साथ मारपीट की और उन्हें धमकाया और उनके साथ ही सुनने में आ रहा है,अमानवीय व्यवहार भी किया गया। पुलिस ने (Day-care center) में काम करने वाली पांच महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है और उनमें से दो को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा, जांच पूरी होने तक डे-केयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि बेंगलुरु के एक डे-केयर सेंटर (Day-care center) में एक बच्चे के साथ कथित तौर पर मारपीट और प्रताड़ना के मामले में दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया है। बेंगलुरु कमिश्नर के अनुसार, इस मामले में दर्ज FIR में एक महिला को दूसरी आरोपी के तौर पर नामजद किया गया है।

बच्चे के साथ कथित दुर्व्यवहार दिखाने वाले वीडियो फुटेज की जांच के दौरान उसकी पहचान की गई और बाद में उसे हिरासत में ले लिया गया। कमिश्नर ने कहा कि आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा और जांच आगे बढ़ने पर उनसे और पूछताछ के लिए हिरासत की मांग की जाएगी। कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार ने उस कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है जिससे वह डे-केयर सेंटर जुड़ा है जहां बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार हुआ था। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के प्रति ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ (सख्त रुख) अपनाया जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
मीडिया से बात करते हुए खड़गे ने बताया कि महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने पहले ही कंपनी से स्पष्टीकरण मांग लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डे-केयर सेंटर चलाने वाले संगठनों को तय दिशानिर्देशों और अपनी वैश्विक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) का सख्ती से पालन करना चाहिए।
डे-केयर (Day-care center) सेंटर पर कारवाई
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने बेंगलुरु में एक IT कंपनी के कैंपस में चल रहे डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ कथित शारीरिक शोषण और प्रताड़ना का स्वतः संज्ञान लिया है। बेंगलुरु अर्बन के डिप्टी कमिश्नर पीएस कंथाराजू को 2 जुलाई, 2026 को लिखे एक पत्र में, NCPCR ने कहा कि वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ परेश शाह के नेतृत्व में एक टीम आज बेंगलुरु का दौरा करेगी और मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए जांच करेगी।
जिला बाल संरक्षण इकाई के कानूनी-सह-परिवीक्षा अधिकारी (Legal-cum-Probation Officer) तिलकेश कुमार की शिकायत पर 29 जून को HAL पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी। यह शिकायत तब दर्ज की गई जब विभाग को WhatsApp पर दुर्व्यवहार के आरोप वाले वीडियो मिले। कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (KSCPCR) के पास भी एक अलग शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायत के अनुसार, यह घटना 25 जून को तब सामने आई जब अधिकारियों ने कंपनी कैंपस में मौजूद डेकेयर में दो से तीन साल के बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच शुरू की। FIR में पांच देखभाल करने वालों (केयरगिवर्स) के नाम हैं: मंजुला, विजयलक्ष्मी, भवानी, सिंधु और बिंदु। शिकायत के अनुसार, बच्चों की देखभाल करने के बजाय, आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी। रोते हुए बच्चों को डराने के लिए कथित तौर पर फ्रंट-लोडिंग वॉशिंग मशीन के ड्रम के अंदर डाल दिया जाता था। कुछ बच्चों को कथित तौर पर पानी से भरे संकरे पाइपों में धकेल दिया जाता था, जबकि अन्य को बाथरूम में बंद कर दिया जाता था। वीडियो में यह भी दिखता है कि देखभाल करने वाले बच्चों पर और उनके रोने के दौरान उनके मुंह में भी टॉयलेट जेट स्प्रे से पानी की बौछार कर रहे थे।
पुलिस अधिकारी का बयान
वीडियो की सामग्री के बारे में बताते हुए एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “छोटे बच्चों को वॉशिंग मशीन के अंदर डाला जाता था, उन पर पानी की बौछार की जाती थी और उन्हें चुप कराने के लिए बाथरूम में बंद कर दिया जाता था।” यह डेकेयर कंपनी के कर्मचारियों के बच्चों के लिए था। कई माता-पिता काम पर जाते समय अपने बच्चों को वहां छोड़ते थे। इन वीडियो ने माता-पिता के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है और कॉर्पोरेट कैंपस के अंदर चल रहे चाइल्डकेयर सेंटर के सुरक्षा मानकों और निगरानी को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा, “बच्चे कैंपस में काम करने वाले पेशेवरों के थे। बच्चों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा था, उससे माता-पिता और अधिकारी चिंतित थे।” मामला दर्ज होने की पुष्टि करते हुए, व्हाइटफील्ड के पुलिस उपायुक्त सैदुलु अदावथ ने कहा कि जांच चल रही है। उन्होंने कहा, “हमने जांच शुरू कर दी है। जिम्मेदार लोगों को नोटिस जारी किए जाएंगे और पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।”
शिकायत पर कार्रवाई करने वाली जिला बाल संरक्षण इकाई ने आरोपों की गहन जांच की मांग की है, जबकि कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है और एक अलग जांच कर रहा है। कंपनी ने कहा कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।।।।
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, कंपनी ने दोहराया कि उसके कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा और भलाई उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। कंपनी ने कहा कि वह कानून लागू करने वाली एजेंसियों और बाल संरक्षण संस्थाओं के साथ पूरा सहयोग कर रही है।
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