भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सीपीआई-एमएल के आह्वान पर आज झारखंड की राजधानी रांची में एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया गया। जिसमें राज्य के अलग अलग जिलों से हाजारों लोग शामिल हुए। इस विरोध प्रदर्शन में मजदूरों, किसानों और अन्य मेहनतकश तबकों की भागीदारी उल्लेखनीय रही।

प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों को आम जनता विशेषकर मजदूरों और किसानों के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका आरोप था कि मौजूदा समय में मेहनतकश वर्ग के अधिकारों और रोजगार पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है साथ ही केंद्र सरकार की नीतियां इन वर्गों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत ग्रामीण गरीबों को वर्ष भर रोजगार सुनिश्चित करने का प्रावधान था लेकिन अब इसे कमजोर कर दिया गया है। उनका दावा था कि नई व्यवस्थाओं में पहले जैसे अधिकार और सुरक्षा नहीं रह गए हैं।
इसी क्रम में श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने चिंता जताई। भाकपा के सुवेंदु दास ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करने वाले पारंपरिक श्रम कानूनों को खत्म कर चार लेबर कोड लागू किए गए हैं। नए लेबर कोर्ड से मजदूर वर्ग पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने देश में एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि गैस सिलेंडर की समस्या के कारण लाखों घरों में चूल्हा नहीं जल पा रहा है। साथ ही गीग वर्कर्स के रोजगार और सुरक्षा को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बताई गई।
इस मुद्दे पर झारखंड ग्रामीण मजदूर समिति और सीपीआई(एमएल) की ओर से एक जनसुनवाई कार्यक्रम भी आयोजित किया गया जिसमें केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया गया।
प्रदर्शन के अंत में आयोजकों ने आम जनता से अपील की कि वे मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं और जनहित के मुद्दों पर संगठित संघर्ष को मजबूत करें।
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