Crude Oil: मध्य पूर्व संकट और गंभीर होने के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। नायमेक्स पर कच्चे तेल का भाव 6 महीने के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है। जानकारों का मानना है कि इस हफ्ते अमेरिका ईरान पर कोई बड़ा हमला कर सकता है। इस डर की वजह से कच्चे तेल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं।
सऊदी अरब पर लगातार खतरे मंडरा रहे हैं। क्योंकि विद्रोहियों का रुक रुक कर हमला जारी है। साथ होरमूज स्ट्रेट पर लगातार संकट बना हुआ है। क्रूड ऑयल में कारोबार करने वाले कमोडिटी एक्सपर्ट मानते हैं कि सबसे बाजार में सबसे ज्यादा डर अमेरिकी हमले को लेकर है। इस डर की वजह से ट्रेडर अपना अपना पोजीशन लंबी अवधि के लिए बनाए हुए हैं या नए कांट्रैक्ट ले रहे हैं जिससे कच्चे तेल के भाव में लगातार उछाल बना हुआ है।
Crude Oil: क्रूड की कीमतें क्यों भारत के लिए मायने रखती हैं?
भारत के लिए कच्चे की कीमतें काफी ज्यादा मायने रखती हैं। क्योंकि भारत अपनी जरूरतों का करीब 80 फीसदी तेल आयात करता है। और हर महीने लाखों डॉलर इसपर खर्च करता है। अगर कच्चा तेल एक डॉलर महंगा होता है तो देश में पेट्रोल- डीजल के भाव में 50 से 60 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी होती है। और अगर कच्चा तेल का भाव 10 डॉलर प्रति बैरल चढ़ता है तो पेट्रोल-डीजल में 5 से 6 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी होती है।
अगर क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहता है तो भारत को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। हमारी जीडीपी पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है और जीडीपी ग्रोथ रेट में करीब 0.9 से 1 परसेंट तक की गिरावट हो सकती है। इसके साथ ही इंपोर्ट बिल बढ़ने और कंपनियों की लागत बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों पर दबाव आता है।
ईरान– अमेरिकी युद्ध में फिलहाल किसी तरह की नरमी के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। जानकार आने वाले दिनों में युद्ध के और गंभीर होने की आशंका जता रहे हैं। ऐसे में 116 डॉलर प्रति बैरल कच्चे तेल से भारत में महंगाई बढ़ सकती है।
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