सदर प्रखंड के नेवाड़ी पंचायत अंतर्गत संचालित तुवेद कोल माइंस को खुले लगभग पांच वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन क्षेत्र के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं और विकास से कोसो दूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस स्थापित करने से पहले डीवीसी (दामोदर वैली कॉरपोरेशन) ने रोजगार, सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और विस्थापितों के पुनर्वास सहित कई बड़े वादे किए थे, लेकिन आज तक उन वादों को धरातल पर नहीं उतारा गया।

ग्रामीणों के अनुसार कंपनी ने खदान शुरू होने से पहले स्थानीय युवाओं को 75 प्रतिशत रोजगार देने, स्कूल–कॉलेज, अस्पताल, पेयजल, बिजली और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया था। हालांकि, पांच साल गुजर जाने के बाद भी क्षेत्र में किसी बड़े विकास कार्य का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल सका है। लोगों का कहना है कि कंपनी केवल आश्वासन दे रही है, जबकि समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
35 सूत्री मांग पत्र अब तक अधूरा
ग्रामीणों ने बताया कि कोल माइंस शुरू होने से पहले डीवीसी अधिकारियों को 35 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया था। इसमें विस्थापितों के पुनर्वास, स्थानीय लोगों को रोजगार, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेयजल व्यवस्था और सुरक्षा जैसी मांगें शामिल थीं। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक एक भी मांग पूरी नहीं की गई है।
लोगों का कहना है कि माइंस से करोड़ों रुपये का कोयला निकाला जा रहा है, लेकिन आसपास के गांवों की हालत आज भी बदहाल बनी हुई है। धूल और प्रदूषण के कारण लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि बार-बार अधिकारियों से बातचीत के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
रोजगार के बजाय पलायन
स्थानीय युवाओं को उम्मीद थी कि कोल माइंस खुलने से उन्हें रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। लेकिन वर्तमान स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस में बाहरी लोगों को प्राथमिकता देकर नौकरी दी जा रही है, जबकि स्थानीय युवाओं की अनदेखी की जा रही है।
रोजगार नहीं मिलने के कारण क्षेत्र के युवा आज भी दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कोलियरी खुलने के बाद गांव के लोगों ने सुनहरे भविष्य का सपना देखा था, लेकिन अब यहां के लोगों की आंखों में निराशा साफ दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। लोगों ने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।





