प्रतिभा को मंजिल तक पहुंचने के लिए हमेशा बड़े शहर और बेहतर संसाधनों की जरूरत नहीं होती। अगर हौसला मजबूत हो, मेहनत लगातार हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो गांव की मिट्टी से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। गढ़वा जिले के मझिआंव खुर्द गांव की बेटी आकृति कुमारी ने अपनी मेहनत और लगन से इसी बात को सच साबित किया है।
ग्रामीण परिवेश से निकलकर निशानेबाजी के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाली आकृति कुमारी का चयन राष्ट्रीय राइफल शूटिंग प्रतियोगिता के लिए पश्चिम बंगाल की ओर से हुआ है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में वह पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। उनके चयन से परिवार के साथ-साथ मझिआंव और पूरे गढ़वा जिले में खुशी का माहौल है।
बचपन से मेहनत और अनुशासन को बनाया हथियार

आकृति कुमारी के पिता अजीत कुमार तिवारी हैं, जबकि उनके दादा चंद्रशेखर तिवारी और दादी अमला देवी हैं। सीमित संसाधनों के बीच पली-बढ़ी आकृति ने कभी परिस्थितियों को अपने लक्ष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने नियमित अभ्यास, अनुशासन और आत्मविश्वास को अपनी सफलता का आधार बनाया।
निशानेबाजी जैसे खेल में एकाग्रता और धैर्य बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आकृति ने लगातार अभ्यास के जरिए इन गुणों को अपने खेल का हिस्सा बनाया और धीरे-धीरे प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर तक अपनी जगह बनाई।
मझिआंव से कोलकाता तक का सफर
आकृति का सफर मझिआंव खुर्द गांव से शुरू होकर पश्चिम बंगाल तक पहुंचा। शिक्षा के लिए उन्होंने कोलकाता क्षेत्र का रुख किया और जेवियर्स मॉडल माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई जारी रखी। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने शूटिंग का अभ्यास भी नियमित रूप से जारी रखा।
एक ओर जहां पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने की चुनौती थी, वहीं दूसरी ओर खेल के क्षेत्र में खुद को साबित करने का लक्ष्य। आकृति ने दोनों के बीच बेहतर संतुलन बनाते हुए अपने सपने की ओर कदम बढ़ाया।
राष्ट्रीय मंच पर प्रतिभा दिखाने का मिला मौका

राष्ट्रीय गन शूटिंग प्रतियोगिता के लिए पश्चिम बंगाल की ओर से चयन आकृति के लिए बड़ी उपलब्धि है। गोरखपुर में मिलने वाला राष्ट्रीय मंच उनके लिए अपनी प्रतिभा और वर्षों की मेहनत को साबित करने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
इस स्तर तक पहुंचने के लिए उन्होंने लंबे समय तक अभ्यास किया है। अब उनकी नजर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने और अपने परिवार, विद्यालय तथा क्षेत्र का नाम रोशन करने पर है।
परिवार और गांव में खुशी का माहौल
आकृति के राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए चयन की खबर से उनके परिवार और गांव के लोगों में उत्साह है। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली एक बेटी का निशानेबाजी जैसे खेल में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।
आकृति की उपलब्धि यह भी दिखाती है कि अगर बेटियों को परिवार का सहयोग और आगे बढ़ने का अवसर मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
दूसरी बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा

आकृति कुमारी की कहानी उन बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। उन्होंने अपने सफर से साबित किया है कि सफलता के लिए जगह से ज्यादा जरूरी मेहनत, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण है।
मझिआंव खुर्द जैसे गांव से निकलकर राष्ट्रीय गन शूटिंग प्रतियोगिता तक पहुंचना आकृति की मेहनत का परिणाम है। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार और गांव, बल्कि पूरे गढ़वा और झारखंड के लिए गर्व का विषय है।
आकृति की कहानी एक संदेश देती है कि मंजिल शहरों की मोहताज नहीं होती। मजबूत हौसला, निरंतर अभ्यास और आगे बढ़ने की जिद हो तो छोटे से गांव की बेटी भी राष्ट्रीय मंच पर अपने हुनर का परचम लहरा सकती है।



